श्रावस्ती। राप्ती नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घट रहा है। राप्ती बैराज पर शनिवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 15 सेमी. ऊपर मापा गया। घटते जलस्तर के साथ कछारवासियों की दुश्वारियां भी कम होने लगी है। लेकिन कटान का खतरा बढने लगा है। वहीं राप्ती की बाढ़ से जलमग्र गांवों में लोग अब भी आवागमन के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं।
नेपाल सहित पहाड़ों पर होने वाली बरसात के कारण राप्ती नदी सहित सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों का जलस्तर बढ़ गया था। जो अब धीरे-धीरे घट रहा है। शनिवार दोपहर एक बजे जमुनहा के राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर 127.85 मीटर मापा गया। जो खतरे के निशान से पंद्रह सेंमी. ऊपर है। यहां खतरे का निशान 127.70 मीटर है। राप्ती नदी के खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण राप्ती के कछार में बसे लौकिहा, अशरफ नगर, सधई पुरवा, चहलवा, सुल्तानाजोत, सर्रा, उत्तमापुर, जिगरिया, नरैनापुर, भग्गनपुरवा, ओरीपुरवा, बरंगा, वीरपुर, हरिहरपुर, महाराजनगर, मिसिरपुरवा, पिपरहवा, गुरदत्तपुरवा, बरुहा सहित कई अन्य गांव अब भी जलमग्न हैं।
वहीं कई गांव बाढ़ से घिरे हैं। जहां आने-जाने के लिए लोगों को छोटी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
वहीं घटते जलस्तर के साथ राप्ती नदी के कछार में बसे गांवों व खेतों में कटान का खतरा बढ़ गया है। जिससे कछारवासियों की धड़कनें तेज हो रही हैं। कई गांवों के संपर्क मार्गों के कटने व क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण लोगों के सामने आवागमन की समस्या उत्पन्न हो गई है। जिलाधिकारी टीके शिबु ने बताया कि राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 15 सेंटीमीटर अधिक है। नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर पर निगरानी रखी जा रही। सभी बाढ़ चौकी प्रभारियों एवं चौकी पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा सभी नोडल अधिकारी एवं उपजिलाधिकारी अपने क्षेत्रों में निगरानी रख रहे है। संभावित बाढ़ वाले गांवों के निवासियों से सीधा संवाद बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।