श्रावस्ती। तराई में सूरज की किरणें आग उगल रही हैं। जेठ की तपती दोपहरी मौसम का पारा 42 डिग्री सेल्सियस पार पहुंच गया है। ऐसे में जहां छाया छांव तलाशने लगी है। वहीं लोगों का घरों से निकलना भी दूभर हो गया है। ऐसे में दोपहर व रात में होने वाली बिजली कटौती ने उपभोक्ताओं की नींद हराम कर रखा है। जरूरत के वक्त आपूर्ति बाधित होने के कारण हर वर्ग के लोग बेहाल है।
जिले में मौसम का मिजाज पूरी तरह से गर्म बना हुआ है। जेठ की तपती दोपहरी में लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है। सुबह से ही आग उगल रही सूरज की किरणें शाम पांच बजे तक राहगीरों की राह रोक रही है। चिलचिलाती धूप व पूर्वा हवाओं के कारण बढ़ी उमस से लोगों को छांव व पंखों के नीचे भी पसीना आ रहा है। इसके चलते सुबह 9 बजे से शाम पांच बजे तक मुख्य मार्ग व बाजार में सन्नाटा दिखाई दे रहा है। लोग गर्मी से बचने के लिए हर संभव प्रयास करते देखे जा रहे हैं।
वहीं बरसात की संभावना न होने के कारण खेतों में लगी मेंथा, गन्ना, सब्जियां आदि फसलों को बचाने के लिए किसानों द्वारा तीसरे दिन उनकी सिंचाई की जा रही है। जिससे फसलों की लागत बढ़ती जा रही है। भीषण उमस भरी गर्मी के कारण सिर्फ इंसान ही नहीं पशु पक्षी भी परेशान देखे जा रहे हैं। गर्मी से बेहाल लोगों की परेशानी बिजली और बढ़ा रही है। सुबह बाधित होने वाली ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति दोपहर बाद बहाल हो रही है। वहीं रात में होने वाली बिजली कटौती ने उपभोक्ताओं की नींद हराम कर रखी है। सुबह शाम होने वाली बिजली कटौती से भीषण गर्मी के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मुसाफिरों की प्यास बढ़ा रहा जल निगम
जिले में मुख्य मार्गों सहित सभी प्रमुख तिराहों व चौराहों पर लगे ज्यादातर हैंडपंप खराब हैं। यही स्थिति गांवों में लगे हैंडपंपों की भी है। शायद ही कोई गांव ऐसा हो जहां लगे एक तिहाई हैंडपंप खराब न हो। इसकी जानकारी के बाद भी जल निगम द्वारा इनकी मरम्मत न कराए जाने से स्थानीय निवासियों सहित मुसाफिरों की परेशानी बढ़ रही है।