श्रावस्ती। कवि घाघ की कहावत मशहूर है कि ‘दिन में बद्दर रात निबद्दर, चले पूर्वा झब्बर झब्बर, घाघ कहैं अस होनी होई कुंआ के पानी में धोबी धोई’। अर्थात सावन मास में दिन में आसमान पर बादल हो और रात में आसमान पूरी तरह से निर्मल हो जाए। धूल भरी पूर्वा हवाएं चले तो ऐसा मान लेना चाहिए कि ऐसा विकराल सूखा पड़ेगा कि धोबी को कपड़े धोने के लिए कुंए का ही सहारा लेना पड़ेगा।
जिले में यही स्थिति विगत एक पखवारे से बनी हुई है, सावन के मेघ दगा दे रहे हैं। शनिवार को तराई क्षेत्र में भले ही झमाझम बरसात के बाद रविवार भोर से चल रही तेज पूर्वा हवाओं के कारण किसान सूखे की संभावनाओं को लेकर आशंकित नजर आने लगे हैं। खेत में लगी धान की फसल को सूखे से बचाने के लिए पंपिंग सेट का सहारा लेने को विवश हैं। शनिवार को सिरसिया क्षेत्र में हुई बरसात को नजर अंदाज कर दिया जाए तो जिले के शेष हिस्से में धूल उड़ रही है। तेज पूर्वा हवाओं के कारण खेतों की नमी भी तेजी से सूख रही है।
धान की रोपाई कर चुके किसानों के सामने अब अपनी फसल को सूखने से बचाने की चिंता उत्पन्न है। लोगों को मानना है कि यदि एक सप्ताह यही स्थिति बनी रही तो धान की पैदावार प्रभावित होगी। जिला कृषि अधिकारी आरपी राना ने बताया कि अभी स्थिति पूरी तरह सामान्य है। कुछ क्षेत्रों में समस्या है, वहां के किसानों को चाहिए कि वह खेतों की नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई कर दें। जिससे फसल प्रभावित न हो। (संवाद)