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जमुनहा क्षेत्र में सीमा स्तंभ बनेंगे चुनावी मुद्दा

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श्रावस्ती। राजस्व गांव के खेतों का चिन्हीकरण करने व गांवों की सीमा निर्धारित करने के लिए दो राजस्व गांवों के बीच सीमा स्तंभ स्थापित कराया जाता है। लेकिन जमुनहा क्षेत्र में हुई चकबंदी के कई दशक बाद भी राजस्व गांवों के बीच सीमा स्तंभ नहीं स्थापित कराया गया है। इससे किसानों के खेत की सीमा का निर्धारण नहीं हो पा रहा है। जिसके लिए किसान लगातार शिकायत भी करते रहे। इस पर कोई कार्रवाई न होने से नाराज जमुनहा क्षेत्र के किसानों ने सीमा स्तंभ को ही मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने की घोषणा की है।
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जमुनहा क्षेत्र में चकबंदी को 40 वर्ष बीत चुके हैं। इसके बावजूद दो राजस्व गांवों को विभाजित करने वाला सीमा स्तंभ चकबंदी विभाग द्वारा अब तक स्थापित नहीं कराया गया है। ऐसे में सीमा क्षेत्र में स्थित किसान का खेत किस राजस्व ग्राम में पड़ रहा है। यह भी तय नहीं हो पा रहा है। एक ग्राम के परिक्रमा मार्ग से पैमाइश के बाद उसी गांव के किसान का खेत दूसरे राजस्व ग्राम में पहुंच जाता है। ऐसे में सीमा क्षेत्र के किसानों के बीच आए दिन टकराव की स्थिति उत्पन्न रहती है। कई बार किसानों की शिकायत के बाद भूमि का सीमांकन करने पहुंचने वाली टीम भी मनमाने तरीके से भूमि पैमाइश कर वापस लौट आते हैं। इसके बाद किसानों में मारपीट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
एक-दूसरे की भूमि पर अपना दावा जताते हुए किसान न तो फसल बोने देते हैं और न ही जल्दी काटने देते हैं। यह स्थिति किसी एक गांव की नहीं बल्कि जमुनहा तहसील क्षेत्र के राजस्व ग्राम गनेशपुर भागण, घुमनी, शिवपुर भागड़, बरगदहा, कलकलवा, गंगाभागड़, बेलरी, कुड़वा, बांसगढ़ी सहित दर्जनों राजस्व गांवों की है। जहां दो राजस्व ग्राम के बीच सीमा स्तंभ स्थापित नहीं कराया गया है। राजस्व ग्राम में सीमा स्तंभ स्थापित कराने के लिए क्षेत्र के किसानों द्वारा विगत कई वर्ष से लगातार मांग की जा रही है। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे नाराज जमुनहा क्षेत्र के किसानों ने इस बार विधानसभा चुनाव में सीमा स्तंभ को ही मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने व चुनाव बहिष्कार करने की घोषणा की है।
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