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बहराइच के मरीजों को भी डायलिसिस का फायदा

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श्रावस्ती। किडनी के मरीजों के लिए श्रावस्ती का संयुक्त जिला चिकित्सालय काफी कारगर साबित हो रहा है। पीपीपी माडल पर संचालित डायलिसिस यूनिट का फायदा जिले के साथ ही बहराइच के मरीजों को भी मिल रहा है। अब तक डायलिसिस करा चुके 13237 मरीजों में से आधे मरीज बहराइच जिले के है।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय में पीपीपी माडल पर संचालित डायलिसिस यूनिट श्रावस्ती ही नहीं आस-पास के इलाकों के मरीजों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है। यहां एक बार में चार मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। एक डायलिसिस करने में करीब चार घंटे का समय लगता है। डायलिसिस रक्त शोधन की एक कृत्रिम विधि होती है। डायलिसिस की प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है जब किसी व्यक्ति के गुर्दे सही से काम करना बंद कर देते हैं। प्रत्येक बार डायलिसिस कराने पर ढाई से तीन हजार रुपये का खर्च आता है।
वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डा. एनएन पांडे ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति में गुर्दे द्वारा जल और खनिज (सोडियम, पोटेशियम क्लोराइड, फास्फोरस सल्फेट) का सामंजस्य रखा जाता है। डायलिसिस स्थायी और अस्थाई होती है। यदि डायलिसिस के रोगी के गुर्दे बदल कर नये गुर्दे लगाने हों तो डायलिसिस की प्रक्रिया अस्थाई होती है। यदि रोगी के गुर्दे इस स्थिति में न हों कि उसे प्रत्यारोपित किया जा सके तो डायलिसिस अस्थायी होती है। यह प्रारंभ में एक माह से लेकर बाद में एक दिन और उससे भी कम होती जाती है।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। मौजूदा समय में 22 मरीज डायलिसिस के आते हैं। इनमें से 13 श्रावस्ती के तो 9 बहराइच के होते हैं। इस यूनिट का संचालन पीपीपी माडल की तर्ज पर हो रहा है।
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डा. जेता सिंह सीएमएस
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