श्रावस्ती। राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से दस सेंटीमीटर ऊपर स्थिर है। राप्ती बैराज पर शुक्रवार को नदी का जलस्तर 127.80 मीटर मापा गया। घटे जलस्तर के साथ कछारवासियों की दुश्वारियां तो कुछ कम होने लगी है लेकिन कटान का खतरा कायम बना है। कटान से परेशान ककरदरी गांव के लोगों ने प्रदर्शन भी किया।
नेपाल सहित पहाड़ों पर होने वाली बरसात के कारण राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ गया था। जो अब धीरे धीरे घट रहा है। शुक्रवार दोपहर एक बजे से जमुनहा के राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर 127.80 मीटर स्थिर बना हुआ है। जो खतरे के निशान से दस सेंटीमीटर ऊपर है। राप्ती नदी के खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण राप्ती नदी के कछार में बसे लौकिहा, अशरफ नगर, सधई पुरवा, चहलवा, सुल्तानाजोत, सर्रा, उत्तमापुर, जिगरिया, नरैनापुर, भग्गनपुरवा, ओरीपुरवा, बरंगा, वीरपुर, हरिहरपुर, महाराजनगर, मिसिरपुरवा, पिपरहवा, गुरदत्तपुरवा, बरुहा सहित कई अन्य गांव अब भी जलमग्न हैं। यहां आने जाने के लिए लोगों को छोटी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
घटते जलस्तर के साथ राप्ती नदी की लहरों ने कछार में बसे ककरदरी गांव के उत्तर कटान शुरू कर दिया है। इससे किसानों के खेत फसल सहित राप्ती नदी की धारा में विलीन हो रहे हैं। इससे नाराज ग्रामीणों ने गांव के बाहर पुलिया पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप था कि गांव में प्रतिवर्ष कटान करती है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया जा रहा है। वहीं मघवापुर घाट पुल के निकट हो रही कटान को रोकने के लिए अब भी ईट डाला जा रहा है। जिलाधिकारी टीके शिबु ने बताया कि राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर है। नदी के घटते-बढ़ते जल स्तर पर निगरानी रखी जा रही। सभी बाढ़ चौकी प्रभारियों एवं चौकी पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है।