शामली। महिलाएं कार और दोपहिया वाहन खरीदने में तो आगे हैं, लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में बहुत पीछे हैं। हर साल पंजीकृत होने वाले लगभग 15 फीसदी वाहन महिलाओं के नाम दर्ज हैं। पिछले एक वर्ष में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या 50 है, जबकि पुरुष इस मामले में काफी आगे हैं। एक साल में करीब 900 पुरुष लाइसेंस बनवा रहे हैं। पिछले दस साल में पुरुषों ने 12 हजार जबकि महिलाओं ने सिर्फ 314 ही लाइसेंस बनवाए हैं।
उपसंभागीय विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में 15 फीसदी वाहन हर साल महिलाओं के नाम से पंजीकृत होते हैं। दोपहिया वाहन, कार यहां तक कि व्यावसायिक वाहन भी महिलाओं के नाम पंजीकृत हैं। इसकी अपेक्षा महिलाओं के ड्राइविंग लाइसेंस बहुत कम बनते हैं। विभाग के मुताबिक शहरी क्षेत्र में महिलाओं व युवतियों की संख्या अधिक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों से लाइसेंस बनाने में बहुत पीछे हैं। इनके बहुत कम ही लाइसेंस बनवाने को आवेदन आते हैं। विभाग के अनुसार जनपद में 543 वाहन महिलाओं के नाम पंजीकृत हैं, जबकि लाइसेंस अभी तक केवल 314 ही बनवाए गए हैं।
- स्कूटी खरीदते समय लाइसेंस के बारे में की जाती है जानकारी
कंपनी के सेल्स मैनेजर अंकुर और राहुल ने बताया कि पंजीकृत वाहनों की संख्या ज्यादा और लाइसेंस की संख्या कम होने के चलते अब स्कूटी या अन्य वाहन महिलाओं के नाम कराने के लिए कहने पर पहले उनसे लाइसेंस बनने की बात पूछी जा रही है। अगर लाइसेंस बना होता है तो उसके नाम ही वाहन पंजीकृत कराए जा रहे हैं, वरना परिवार के अन्य सदस्य के लाइसेंस नाम होने पर उनके नाम ही वाहन पंजीकृत कराया जा रहा है। सालभर में ऐसे मामले लगभग 40 प्रतिशत आते हैं।
- बिना लाइसेंस के पांच हजार जुर्माना
एआरटीओ विभाग के अनुसार बगैर लाइसेंस के वाहन चलाने पर अधिकतम पांच हजार रुपये का अधिकतम जुर्माना होता है। यदि चालक के पास डीएल नहीं है तो दुर्घटना होने की स्थिति में बीमा क्लेम भी नहीं मिलता। अगर आप दोपहिया या चार पहिया वाहन चलाते हैं तो ड्राइविंग लाइसेंस होना बहुत जरूरी है।
- इन्होंने कहा
महिलाओं के नाम वाहन भले ही पंजीकृत हो, लेकिन उनके लाइसेंस की संख्या कम है। छात्राएं और कामकाजी महिलाएं ही लाइसेंस बनवाने पर ध्यान देती हैं। महिलाओं में जागरूकता लाने की जरूरत है। - रोहित राजपूत, एआरटीओ