जलालाबाद क्षेत्र में लहसुन की छंटाई करते मजदूर।
- फोटो : SHAMLI
जलालाबाद। क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए लहसुन की फसल इस बार घाटे का सौदा साबित हुई। किसानों को उम्मीद थी कि दाम दोगुना तक जाएगा, लेकिन बढ़ना तो दूर अल्टा कई गुना दाम नीचे आ गया है।
जलालाबाद क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे किसान है जो लहसुन का उत्पादन कर दूर-दर तक देश की मंडियों में बिक्री के लिए भेजते हैं। फसल के समय किसानों का लहसुन का भाव 50 से 60 रुपये किग्रा का भाव था। लहसुन उत्पादक किसानों ने अपने घरों में लहसुन को साफ-सफाई और कटाई-छंटाई कर बोरों में भरकर रखा था। यह सोचकर कि जनवरी-फरवरी में लहसुन का भाव 100 से 125 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकेगा। जिससे उनके हाथ अच्छा मुनाफा लग जाएगा। लेकिन अब किसान माथा पकड़ कर रोने को तैयार है। क्योंकि अब लहसुन का भाव 12 रुपये से लेकर 15 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। बाहर की मंडियों में लहसुन का उठान और मांग नहीं है। घरों व गोदामों में रखे लहसुन को किसान बाहर निकालकर साफ-सफाई कर बेचना चाह रहा है। उधर, लहसुन की अगली फसल भी तैयारी पर है। जो मार्च-अप्रैल में खुदाई शुरू कर आनी प्रारंभ हो जाएगी।
18 से 25 हजार बीघा आती है लागत
किसान मोहम्मद साजिद मलिक, दर्शन रावड़ा, किसान सरदार राजकुमार सिंह, किसान राकेश सैनी आदि का कहना है कि किसान का प्रति बीघा लहसुन लगाने का 18 से 25 हजार रुपये का पानी, खाद, बीज, खुदाई, तक आदि का खर्च आ जाता है, जो फसल पर लगभग 30 से 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लहसुन बिक जाता है। लेकिन इस बार लहसुन का भाव ने मिलने से किसान परेशान हैं। लहसुन उगाना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हुआ है। जबकि जलालाबाद क्षेत्र के ग्राम में लगभग हजारों बीघा भूमि पर किसान लहसुन की खेती करते हैं और लहसुन को पक्की फसल माना जाता है। जो भारत के पंजाब, लुधियाना, अमृतसर, दिल्ली, मुंबई आदि दूर-दर तक भेजा जाता है। जिससे किसानों की फसल का वाजिब दाम मिल जाता था। लेकिन इस वर्ष उचित दाम न मिलने से किसान परेशान हैं।