हाल ही में पुलिस ने शामली के नौ कुआं रोड के रहने वाले बिलाल और तसलीम को गिरफ्तार किया है। दोनोंं के भाई इमरान को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पकड़े गए दोनों आरोपियों ने पुलिस और जांच एजेंसियों की पूछताछ में कई खुलासे किए हैं।
बताया कि वह सरगना नफीस से लेकर ही नकली नोटों को खपा रहे थे। जांच में पता चला है कि नफीस पाकिस्तान में बैठे आईएसआई के एजेंटों के संपर्क में रहकर शामली के अलावा बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, गाजियाबाद, हरियाणा, पंजाब के लुधियाना, अमृतसर आदि जिलोंं में नकली नोटों को खपा रहा है। पुलिस पकड़े गए दोनों आरोपियों की कॉल डिटेल और सोशल मीडिया एकाउंट भी खंगाल रही है। माना जा रहा है कि दोनों के मोबाइल से अहम सुराग हाथ लग सकते हैं। दोनों के मोबाइलों को फॉरेंसिक जांच को भी भेजा जाएगा।
लगातार गिरोह में सदस्य जोड़ रहा नफीस, दिखाता है आलीशान जिंदगी के सब्जबाग
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि गिरोह का फरार आरोपी नफीस लगातार गिरोह में सदस्यों को जोड़ रहा है। वह गिरोह में युवाओं को जोड़ता है। उन्हें आलीशान जिंदगी का सब्जबाग दिखाकर नकली नोटों को खपाने के लिए कहा जाता है। पुलिस ओर जांच एजेंसियां गिरोह के फरार सदस्यों का पता लगाने में जुट गई, ताकि गिरोह पर पूरी तरह से शिकंजा कसा जा सके।
कलीम और तहसीम का निकल चुका आईएसआई कनेक्शन
पुलिस और एसटीएफ ने शामली के कलीम को आईएसआई एजेंट होने के आरोप में पकड़ा था। आरोप है कि कलीम और उसका भाई तहसीम आईएसआई के संपर्क में थे और कलीम सैन्य क्षेत्रों की जानकारी आईएसआई को भेजता था। कलीम को गिरफ्तार किया जा चुका है, मगर तहसीम को पकड़ने में पुलिस नाकाम है।
60 प्रतिशत तक कमिशन का दिया जाता था झांसा
पकड़े गए दोनों आरोपियों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि नफीस उनसे अधिकतर मोबाइल पर ही बात करता था। वह नकली नोटों को चलाने के बदले 60 प्रतिशत तक कमिशन देता था। मेले और भीड़भाड़ वाले इलाकों में नकली नोटों को चलाया जाता था।