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डीसीओ को लगाई फटकार: वीएम सिंह बोले- आंखें नीची कर करें बात, भाजपा पर बोला हमला, किसानों के लिए कही बड़ी बात

Thu, 21 Sep 2023 06:34 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, शामली

सार

Shamli News : किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह ने डीसीओ को फटकार लगाई और कहा कि आंखें नीचे कर बात करें। इस दौरान उन्होंने भाजपा और विपक्ष पर जमकर हमला बोला। साथ ही उन्होंने किसानों के लिए यह बड़ी बात कही।
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किसानों के बीच बैठे वीएम सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गन्ना समिति कार्यालय में चल रहे धरने में पहुंचे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह ने कहा कि विपक्ष सिर्फ किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर ही आगे बढ़ता है और जब सत्ता हासिल कर लेता है तो वह किसानों के दुख दर्द को भूल जाता है। ऐसा भाजपा ने भी किसानों के साथ किया और सत्ता में आने के बाद किसानों को धोखा दे दिया। उन्होंने किसानों को खुद मजबूत होकर अपना हक लेने के लिए आगे आने का आह्वान किया और नेताओं का सहारा न लेने की अपील की। 

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किसानों के चल रहे धरने में बृहस्पतिवार को पहुंचे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह ने किसानों में जोश भरते हुए कहा कि वह यहां किसी भी किसान संगठनों की बुराई करने नहीं आए है। वह सिर्फ किसानों के हक की बात करने आए हैं। किसान जब तक नेताओं का सहारा लेना व धरने प्रदर्शन में चंदा देना नहीं छोड़ेंगे तब तक उनका भुगतान नहीं हो सकता। यदि उनको अपना बकाया गन्ना भुगतान करना है तो विधायक, एमएलसी, सांसद, राज्यसभा सांसद, मंत्रियों व मुख्यमंत्री को अपनी ताकत का अहसास कराना होगा। यह तभी होगा जब उनमें एकता होगी और उनके साथ कोई नेता नहीं होगा।

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उन्होंने कहा कि वह हर गांव में दस-दस व्यक्तियों का संगठन बनाए और जब भी धरना-प्रदर्शन करने जाए तो सभी को साथ लेकर जाएं। धरने पर किसी भी नेता को न आने दें। फिर देखे डीएम खुद उनके घरों पर जाकर बकाया गन्ना भुगतान कराएगा। कहा कि विपक्ष दल सिर्फ किसानों का सहारा लेकर सत्ता हासिल करना चाहता है। ऐसा ही भाजपा ने किया। वर्ष 2012 में जब सपा सत्ता में आई थी तो उसके बाद भाजपा ने पूरे प्रदेश के कलक्ट्रेट में तंंबू लगाकर धरना दिया था और अब दूसरी बार भी सत्ता में आ गई, लेकिन गन्ना भुगतान की समस्या का समाधान नहीं हुआ। यह सभी दल एक जैसे होते हैं और किसानों को वोट बैंक समझकर सत्ता हासिल करना चाहते हैं। किसानों को अब खुद भुगतान लेने के लिए अपना दम दिखाना होगा, ताकि उनका कोई भी नेता सहारा न ले सकें। 

आंखें नीची कर बात करें डीसीओ 
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह जब जिला गन्ना अधिकारी से बकाया भुगतान व ब्याज को लेकर वार्ता कर रहे थे तो उन्होंने आंखें ऊपर कर बात करनी शुरू की तो डीसीओ को फटकार लगाते हुए कहा कि वह आंखें नीची कर बात करें, यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। वह किसानों के साथ खड़े हैं और भुगतान नहीं होगा तो किसान दूसरा रास्ता अपनाना जानते हैं। 

पूर्व गन्ना मंत्री शामली का, फिर भुगतान न होना शर्म की बात 
किसान नेता ने कहा कि शामली के लिए यह शर्म की बात नहीं होगी तो फिर क्या होगा। पिछली सरकार में गन्ना मंत्री शामली का होने के बावजूद भी भुगतान नहीं हुआ। जनता ने उनको हराकर यह सही कार्य किया है और जो नेता भुगतान नहीं करा सकता उसको गद्दी पर बैठने का अधिकार नहीं। 

गन्ना सोसाइटी के चेयरमैन मिल मालिकों की बैठते हैं गोद में 
किसान नेता ने कहा कि गन्ना सोसाइटी का चेयरमैन बनने के बाद वह किसानों का भला नहीं सोचते हैं और किसानों को धोखा देने के बाद मिल मालिकों की गोद में जाकर बैठते हैं। यदि हक चाहिए तो अपने बीच के किसी इमानदार किसान को चेयरमैन बनाना होगा, ताकि उनका भुगतान हो सके। उन्होंने कहा कि इस साल की वह गन्ना भुगतान कराने की जिम्मेदारी नहीं लेते है, लेकिन एक साल बाद ऐसा कर जाऊंगा कि किसानों को गन्ना भुगतान के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि उनके खाते में 14 दिन पूरा होते ही भुगतान हो जाएगा। 

गन्ना मंत्री का मिला ऑफर, लेकिन किसानों के लिए ठुकराया 
किसान नेता वीएम सिंह ने कहा कि कई सरकारों ने उनको गन्ना मंत्री बनाने का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने किसानों के लिए यह ऑफर ठुकरा दिया। कहा कि वह एक ईमानदार है और सरकार के इशारे पर मंत्रियों का काम करना पड़ता है। इसलिए वह किसानों के हक की आवाज उठाने के लिए मंत्री नहीं बन सकते है। वह सिर्फ किसानों के साथ उनका हक दिलाने के लिए लिए चलते रहेंगे। 

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ये रहे मौजूद 
धरने पर संरक्षक बाबा संजय कालखंडे, संयोजक संजीव शास्त्री, बहादुर कालखंडे, अर्जुन सिंह, विरेंद्र सिंह, संजीव बाबा, आत्मराम, तेग सिंह चौहान, धर्मेंद्र कालखंडे, सौरान पंवार, जयवीर सिंह, सतवीर सिंह, शमशाद, देशवाल, अनिल शर्मा, करमवीर सिंह, यशपाल सिंह, संजीव, मनजीत, जितेंद्र, सतवीर, सतनाम सिंह, राजेंद्र सिंह, लखवेंद्र सिंह, अशवीर आदि मौजूद रहे।

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