गांव का अस्पताल, 1.20 करोड़ खर्च के बाद भी बदहाल
बाबरी। गांव में भंदौडा मार्ग पर 2009 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण करीब 1.20 करोड़ रुपये से हुआ था। जो अब पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुका है। झाड़ियां उग आईं, कई बार सांप भी निकल चुके हैं। पेयजल की व्यवस्था तक नहीं है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार बेड की सुविधा मरीजों के लिए की गई थी। लेकिन इन बेडों पर धूल चढ़ी हुई है। वार्ड ब्वाय व स्वीपर की नियुक्ति आज तक नहीं हो पाई है। ऑपरेशन थियेटर धूल से भरा हुआ है। लेबर रूम का फर्श टूट चुका है। जिसमें कई बार सांप भी निकल चुके हैं। शौचालय भी गंदगी से अटे पड़े हैं।
कुछ समय पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह का तबादला बलिया हो गया था। इसके बाद यहां किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं हो पाई है। अस्पताल में पेयजल की व्यवस्था नहीं हैं, स्टाफ को पानी के भटकना पड़ता है। परिसर में चारों ओर झाड़ियां खड़ी हैं। सांप निकलने के कारण दहशत बनी रहती है।
चिकित्सक न होेने के कारण मरीजों को फार्मासिस्ट रजनीश कुमार ही दवाइयां वितरित करते हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर बाबरी, हिरनवाड़ा, भंदौडा, गोगवान, रायपुर, सूरजपुर, रघुनाथपुर, कैड़ी, बंतीखेड़ा आदि गांवों के मरीज उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आते हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।