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अरबी में दी जा रही इतिहास की तालीम

Mon, 17 Apr 2017 12:10 AM IST
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
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education - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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थानाभवन। मदरसों में भी अरबी कोर्स के जरिए ही छात्रों को इतिहास पढ़ाया जा रहा है। हिंदी, अंग्रेजी और गणित की किताबें निजी प्रकाशकों की पढ़ाई जा रही हैं, लेकिन भूगोल नहीं पढ़ाया जा रहा है। 
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मुख्यमंत्री ने मदरसों के पाठ्यक्रम में बदलाव कर हिंदी, अंग्रेजी, गणित, इतिहास और भूगोल की शिक्षा के साथ तकनीकी शिक्षा को शामिल किए जाने पर जोर दिया है। थानाभवन में 1301 हीजरी में मौलाना अशरफ अली द्वारा स्थापित इमदादुल उलूम खानका मदरसा में दीनी तालीम के लिए वहां किताबों की कोई कमी नहीं है।

करीब 950 किताबों वाली लाइब्रेरी है, मगर अधिकांश किताबें अरबी में हैं। हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास और गणित की केवल एक-एक किताब पढ़ाई जा रही है। भूगोल विषय पढ़ाया ही नहीं जा रहा है। मदरसे के प्रबंधक मौलाना हुजैफा नजम थानवी ने बताया कि मदरसे में दुनियावी तालीम इस्लामी माहौल में दी जाती है। चौथी कक्षा के पश्चात दीनी तालीम लेने वाले किसी भी मदरसे जलालाबाद या देवबंद में चले जाते हैं तथा दीनी और दुनियावी तालीम के लिए इस्लामिया इंटर कॉलेज में तालीम दी जाती है। 
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उन्होंने बताया कि मदरसे में 180 छात्र हैं, जिन्हें हिंदी की कलरव पुस्तक, गणित की बाल गणित, अंग्रेजी ग्रामर और इतिहास में तारीख ए शामली, तारीख ए हिंदुस्तान, तारीख ए इस्लाम पढ़ाई जाती है। भूगोल विषय नहीं पढ़ाया जाता। तकनीकी शिक्षा के लिए मदरसे में पांच कंप्यूटर हैं, जिनसे तीन और चार कक्षा के छात्रों को तालीम दी जाती है।

मदरसे की स्थापना विश्व प्रसिद्ध हजरत मौलाना अशरफ अली थानवी ने की थी। मौलाना अशरफ अली द्वारा लिखित बहस्ती जेवर, आनमोल कुरानी और रहन सहन के अदब बेहद मशहूर रहीं और हिंदुस्तान के साथ-साथ विदेशों के मदरसों में भी पढ़ाई जाती है। मौलाना अशरफ अली थानवी द्वारा लिखित 950 पुस्तकों की लाइब्रेरी भी थानाभवन के मदरसे में है। 

छात्र अय्यूब, नूर मोहम्मद, फुरकान और शारूफ ने बताया कि मदरसे में हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास की किताबें पढ़ाई जाती है। उन्होंने उन किताबों का नाम भी पता है, लेकिन सरकारी पाठ्यक्रम की किताबों का उन्हें ज्ञान नहीं है। मदरसा प्रबंधक ने बताया कि सरकार की ओर से उनके मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों को वजीफा नहीं मिलता है और न ही वह लेंगे। मदरसे में पढ़ने वाले 40 बच्चों को मदरसा स्वयं वजीफा देता है और सभी बच्चों की खाने व रहने की व्यवस्था करता है। मौलाना ने बताया कि दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम के वह पक्षधर हैं और उसके लिए प्रयासरत हैं। सरकार को इसके लिए अभी बहुत कुछ करना चाहिए।
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