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Shamli News: 1300 रुपये लिए, ट्रेनिंग कराई और मशीन दूसरे को दे दी

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प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में दलालों और विभागीय कर्मचारियों का खेल
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दलाल बोला- जल्द दिला दी जाएगी मशीन, लिस्ट में नाम आ चुका है
पीड़ित महिलाएं बोलीं- बार-बार मांग के बाद भी नहीं हो रही सुनवाई

संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के नाम पर महिलाओं से भी वसूली का मामला सामने आया है। सिलाई मशीन और अन्य उपकरण दिलाने के नाम पर महिलाओं से 1300 से 1500 रुपये तक लिए गए। इसके बाद शहर की जैन धर्मशाला में तक प्रशिक्षण भी कराया गया, लेकिन छह माह से लेकर एक साल बाद तक महिलाओं को मशीनें नहीं मिल पाई हैं। दूसरों को मशीनें दे दी गई।
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं, दलाल अब भी महिलाओं को जल्द मशीन मिलने का भरोसा देकर टरका रहे हैं। पड़ताल के दौरान एक दलाल से बातचीत की गई तो उसने बताया कि मशीनों की कमी के कारण देरी हुई है और जल्द ही मशीन उपलब्ध करा दी जाएगी।
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दलाल से बातचीत...
संवाददाता : भाई, मेरी बहन को सिलाई मशीन दिलानी थी। ट्रेनिंग भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक मशीन नहीं मिली।
दलाल : जल्द मिल जाएगी। मशीनें कम पड़ गईं थीं।
संवाददाता : फिर ट्रेनिंग क्यों कराई गई थी?
दलाल : अधिकारियों ने कहा था, इसलिए ट्रेनिंग कराई गई थी। इस माह मशीन दिला दी जाएगी, टेंशन मत लो।

ट्रेनिंग के बाद भी मशीन के लिए लगा रहीं चक्कर
कुड़ाना निवासी अनीता का कहना है कि करीब एक साल पहले विश्वकर्मा योजना के तहत सिलाई मशीन के लिए फाॅर्म भरवाया गया था। इसके लिए 1300 रुपये लिए गए थे। कुछ दिनों बाद शामली की धर्मशाला में प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया। प्रशिक्षण के बाद उनके खाते में 4500 रुपये आए थे, जिसमें से फाॅर्म भरवाने वालों ने 1500 रुपये की मांग की। रुपये नहीं देने पर मशीन नहीं मिलने की बात कही गई। इसके बाद गांव की अन्य महिलाओं के साथ उन्होंने रुपये दे दिए, लेकिन आज तक मशीन नहीं मिली। जबकि उनका नाम वर्ष 2025 की सूची में शामिल है।
- दूसरों को दे दी मशीन
सेहटा निवासी अंजू ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले फाॅर्म भरा था, जिसके लिए 12 सौ रुपये दिए थे। इसके बाद पांच दिन तक शामली में प्रशिक्षण लिया। सूची में नाम आने के बाद वह मशीन लेने के लिए कंडेला कार्यालय गईं। वहां बताया गया कि उनकी मशीन किसी अन्य को दे दी गई है और 15 दिन बाद दूसरी मशीन दिलाई जाएगी। एक साल बीतने के बाद भी मशीन नहीं मिल पाई है।
दो साल से मशीन का इंतजार
काबड़ौत निवासी रेखा का कहना है कि दो साल होने वाले हैं, लेकिन अभी तक मशीन नहीं मिली। कंडेला कार्यालय जाने पर उन्हें वापस भेज दिया जाता है और सही तरीके से बात भी नहीं की जाती। हर बार यही कहा जाता है कि मशीन ऊपर से नहीं आई है, जबकि उनका नाम सूची में शामिल है।
प्रशिक्षण के बावजूद मशीन नहीं मिली
कुड़ाना निवासी संगीता ने बताया कि एक साल से अधिक समय पहले सिलाई मशीन के लिए फाॅर्म भरा था। इसके लिए 1300 रुपये लिए गए थे और प्रशिक्षण भी कराया गया। मगर मशीन नहीं मिली।
ट्रेनिंग के प्रमाणपत्र भी मौजूद
महिला अंजू का कहना है कि उन्हें दी गई ट्रेनिंग का प्रमाणपत्र भी उनके पास मौजूद है। इसके बावजूद उन्हें मशीन नहीं दी जा रही है।
इन्होंने कहा
विश्वकर्मा योजना के नाम पर महिलाओं और अन्य पात्रों से वसूली करने के मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। - रतिका, उपायुक्त उद्योग
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कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू हुई योजना
केंद्र सरकार ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू की है। योजना के तहत कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए 15 हजार रुपये की टूलकिट सहायता, पांच प्रतिशत ब्याज दर पर तीन लाख रुपये तक का ऋण और बाजार से जोड़ने की सुविधा दी जाती है। योजना का उद्देश्य कारीगरों को आर्थिक सहायता देकर उनके पारंपरिक व्यवसाय को मजबूत बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

नोट: कल के अंक में पढ़िए...
घर-घर जाकर महिलाओं और अन्य लोगों से विश्वकर्मा सहित अन्य योजनाओं के नाम पर फाॅर्म भरवा रहे दलाल, विभागीय अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी बने अनजान।
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