मकान की छत गिरी, चार लोग मलबे में दबे
कैराना/बाबरी (शामली)। चार दिनों से हो रही बारिश के चलते गांव रामड़ा में कच्चे मकान की छत गिर गई। छत के मलबे में दबने से परिवार की दो महिलाओं सहित चार लोग घायल हो गए। गांव निवासी अकबर का परिवार शनिवार शाम अपने घर पर बैठा था। चार दिन से हो रही बारिश के चलते अकबर के मकान की कच्ची छत अचानक नीचे गिर गई। वहीं, गांव चूनसा में मकान की छत गिर जाने से दो बच्चे मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए।
छत के मलबे में दबने से अकबर की पत्नी मनीबा, पुत्र फुरकान, पुत्रवधू परवीन व पौत्र सलमान घायल हो गए। आसपास के लोगों ने मलबे के नीचे से घायलों को बाहर निकाल कर सरकारी अस्पताल पहुंचाया जहां उपचार के बाद उन्हे छुट्टी दे दी गई। परवीन को काफी चोट आई है। मलबे में दबने से घर में रखी चार चारपाई, कूलर, फ्रिज, संदूक व अन्य सामान क्षतिग्रस्त हो गया। सूचना पर क्षेत्र के लेखपाल सचिन कुमार मौके पर पहुंचे और नुकसान के बारे में जानकारी ली। पीड़ित अकबर ने प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई है।
वहीं, गांव चूनसा में मांगेराम पुत्र श्याम सिंह का मकान लगातार चार दिन से हो रही बारिश के चलते मकान की छत गिर गई जिसमें आठ वर्षीय पुत्री भारती और 14 वर्षीय पुत्र पवन कुमार मलबे में दब गए। मकान की छत गिरने के आवाज सुनकर आए आसपास के ग्रामीणों ने परिजनों के साथ मिलकर बच्चों को मलबे से निकाला। बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। भारती की हालत गंभीर बताई जा रही है। उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। सूचना पर एसडीएम बृजेश कुमार मौके पर पहुंचे व ग्रामीणों से जानकारी ली।
निकासी न होने के चलते घरों में भरा पानी
बाबरी। चार दिन से हो रही बारिश के कारण बाबरी की पाल धर्मशाला में मंदिर के पास दर्जनों घरों में पानी घुस गया। जिसके चलते ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर पानी भरा हुआ है। जिसमें राहगीरों को आने-जाने में भी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। बारिश के चलते फसलों में नुकसान हो गया है। बाबरी क्षेत्र में सैकड़ों बीघा सरसों की फसल गिरने से किसानों को भारी हानि हुई है। आलू, चना व सरसों में बरसात के कारण नुकसान हुआ है।
लगातार बारिश से ओवरफ्लो होकर टूटी मामौर झील
कैराना। चार दिन दिन से रुक रुककर हो रही बारिश के कारण मामौर झील ओवरफ्लो हो गई। रविवार सुबह करीब पांच बजे झील के पानी को रोकने के लिए बनाई गई मिट्टी की मेड़ बंगले के पास से टूट गई। जिसके बाद झील का गंदा पानी आसपास के किसानों की गेहूं की फसल में भर गया।
मामौर निवासी किसान इमरान, जुल्फान, सफात, आरिफ, वसी, शकीला, पप्पू, भूरा, रिंकू, नेपाल, पीरू, लतीफ, इलियास, मीनू आदि की सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई। झील का पानी फसलों में घुसने के बाद यमुना बांध के निकट तक पहुंच गया। किसानों ने इसकी सूचना एसडीएम को दी। जिसके बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची तथा पोर्कलेन मशीन से मिट्टी की आड़ लगाकर पानी रोका। पहले भी 28 दिसंबर को झील ओवरफ्लो होकर टूट गई थी। उस समय भी दर्जनों किसानों की सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल नष्ट हो गई थी। शनिवार को मामौर झील तक कैराना से आने वाला गंदे पानी का नाला भी पंजीठ के पास आवेरफ्लो होकर टूट गया था। जिससे कई किसानों की गेहूं की फसल में पानी भर गया था। किसान पुष्कर सैनी, शिवकुमार, इमरान आदि ने बताया कि उन्हें आज तक भी फसलों के नुकसान का मुआवजा नहीं मिल सका। एक बार फिर झील के पानी ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया है।