संयम धर्म का पालन करने वाले के लिए खुलते हैं मोक्ष के द्वार
शामली। श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आत्म शुद्धि दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई। शांति धारा आशीष जैन, प्रवीन जैन, पराग जैन व डॉ. भूपेंद्र जैन परिवार ने कराई। सौधर्म इंद्र भूषण लाल जैन व अनीता जैन रहे।
विधानाचार्य सतेंद्र जैन टीकमगढ़ ने विधि विधान से पूजा-अर्चना कराई। विधानाचार्य ने उत्तम संयम धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंच इंद्रियों को वश में करना उत्तम संयम धर्म है। मनुष्य को जगत के सभी जीवों पर पर करुणा करनी चाहिए। संयम रखने वाले के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। संगीतकार रमेशचंद्र नामदेव ने संगीतमय भजन सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर अध्यक्ष सुदेश कुमार जैन , मंत्री राजेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, संयोजक वीरेश जैन, पंकज जैन, भूषण लाल जैन, रीना जैन, रेखा जैन, इंदु जैन, शशी जैन, अरविंद जैन गढ़ी आदि मौजूद रहे।
आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर धर्मपुरा में दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई। आदिनाथ वीतराय पाठशाला के तहत छोटे-छोटे बच्चों द्वारा धार्मिक नृत्य व प्रश्न मंच का आयोजन किया गया। शांति धारा अंकित जैन परिवार ने कराई। पंडित मुन्ना लाल जैन ने विधिविधान से पूजा अर्चना कराई। इस दौरान उन्होंने कहा कि इंद्रियों पर नियंत्रण करना उत्तम संयम धर्म है। श्रद्धालुओं ने अभिषेक जैन, अरविंद जैन, नरेश जैन, गौरव जैन, दीपा जैन, अनीता जैन, मंजू जैन, संध्या जैन, स्वीटी जैन आदि रहे। आदिनाथ वीत राय पाठशाला के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम में धार्मिक नृत्य कार्यक्रम का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसमें छोटे बच्चों ने भाग लिया गया और उनको पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। बच्चों में दीवाशु जैन, पारवी जैन, अनुष्का जैन, पराग जैन आदि रहे। निर्णायक की भूमिका डोली जैन ने निभाई। इस अवसर पर मुख्य संरक्षक जेके जैन, कलश वाले, सकल जैन समाज के अध्यक्ष आलोक जैन, मुख्य संयोजक अनिल कुमार जैन बैग वाले, अध्यक्ष संतोष जैन, सचिव प्रवीण जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, दीपक जैन, अशोक जैन, अजय जैन, श्रेयांश जैन, चंचल जैन, वीरेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
पंच इंद्रिय को वश में रखना ही उत्तम संयम धर्म
गढ़ीपुख्ता। दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र में दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई। अपने अंत:करण को विवेक पूर्वक पवित्र रखना ही उत्तम संयम धर्म है। बिना संयम साधना के मनुष्य पशु तुल्य है। मनुष्य को संयमी जीवन जीना चाहिए। मनुष्य द्वारा कोई भी गलती किए जाने पर वह प्रायश्चित करने की क्षमता रखता है, जो मानव को पशु से भिन्न कर देता है। पंच इंद्रियों को वश में रखना ही संयम है। संयमी मनुष्य के लिए मोक्ष के द्वार खुलते हैं। प्रक्षाल शांति धारा के पश्चात विधि विधान से पूजा पाठ शुरू हुआ। तेरह दीप महामंडल विधान के अंतर्गत तृतीय मेरु अचल मेरु की पूजा संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने आरती एवं भजन किए। शांति धारा दीपक राय जैन ने की इस अवसर पर अनिल जैन, नीरज जैन, दीपक जैन, सुरेश जैन, संजीव जैन, स्मिता जैन, नीलम जैन, रेनू जैन आदि मौजूद रहे।