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तना और फल बेधक कीट सक्रिय, किसान चिंतित

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शामली। तना और फल बेधक कीट सक्रिय हो जाने से सब्जियों को नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ गई है। जिससे किसान चिंतित हैं। वहीं, जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को कीट के नियंत्रण के लिए उपाय बताकर सावधान किया है।
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जिला उद्यान अधिकारी डॉ. हरित कुमार ने बताया कि जिले में गुणवत्ता युक्त शाक भाजी उत्पादन के लिए कीट का उचित समय पर प्रबंधन नितांत आवश्यक है। वर्तमान में तना बेधक कीट तथा फल बेधक कीट द्वारा बैगन, भिंडी एवं कुकरबिट्स (कद्दू, लौकी, तरोई, करेला, टिण्डा, खीरा आदि सब्जियों को अत्यधिक क्षति पहुंचाने की संभावना होती है। तना बेधक कीट बैगन, भिंडी एवं कुकरबिट्सकद्दू, लौकी, तुरुई, करेला, टींडा, खीरा आदि की फसलों में तना में छेद कर हानि पहुंचाता है। क्षतिग्रस्त वाली जगहों पर भूरे रंग का गोंद जैसा स्राव निकलता है। प्रभावित गांठ के ऊपर की शाखाएं सूख जाती है। फल मक्खी फलों में डंक मार कर अंडे देती है, जिससे सूड़ियां निकल कर फलों को सड़ा देती है तथा फलों का आकार छिद्रयुक्त हो जाता है।
कैैसे करें रोग से नियंत्रण उपाय
डीएचओ के मुताबिक तना और फल बेधक कीट के नियंत्रण हेतु कीट से प्रभावित सूखे तने एवं फल को तोड़कर जमीन में गाड़ देना चाहिए। ट्राइकोग्रामा के 2-3 कार्ड को प्रति हेक्टेयर साप्ताहिक अंतराल पर खेत में लगाने से कीट का प्रकोप कम होता है। चार प्रतिशत नीम की गिरी 40 ग्राम नीमगिरी का चूर्ण एक लीटर में पानी में का घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। फल मक्खी के प्रकोप को रोकने के लिए मैलाथियॉन 50 ईसी दो मिली लीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें, अगर फल मक्खी का प्रकोप सतत हो तो 10 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव दोहराए। मटमैले-भूरे रंग के महीन कीट जिन्हें चेक या मोयला (एफिडस) के नाम से जाना जाता है। यह पत्तियों का रस चूसकर फसल की वृद्धि एवं उत्पादन को प्रभावित करते हैं। नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोरपिड 200 एस.एल. 0.3 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। 10 मीटर के अंतराल पर फेरोमेन ट्रेप-100 प्रति हेक्टेयर की दर से लगाकर वयस्क नर नष्ट कर देना चाहिए।
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