शामली। फरवरी के दूसरे और तीसरे सप्ताह में गेहूं की फसल की देखभाल जरूरी है। गन्ने और भिड़ी की उन्नत किस्मों को उगाकर किसान अधिक पैदावार पा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसलों को रोगों से बचाव के टिप्स दे रहे हैं।
सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ के ग्रामीण कृषि सेवा के नोडल अधिकारी प्रोफेसर यूपी शाही और कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डाॅ. संदीप चौधरी के अनुसार इस मौसम में गेहूं की फसल की देखभाल जरूरी है। तापमान और बढ़ता है तो गेहूं के पौधों की वृद्धि प्रभावित होगी। इसका असर पैदावार और गुणवत्ता पर पड़ेगा। फिलहाल सुबह-शाम की ठंड है, ऐसे में किसान खेतों में नमी रखने के लिए समय-समय पर सिंचाई करते रहें, जिससे गेहूं की अच्छी पैदावार हो सके।
गेहूं की फसल के लिए यह करें
गेहूं की दूसरी सिंचाई बुवाई के 40 से 50 दिन तथा तीसरी सिंचाई 60 से 65 दिन की अवस्था में कर दें। चौथी सिंचाई बुवाई के 80 से 85 दिन बाद पुष्पावस्था पर करें।
गन्ना के लिए यह करें
वसंत कालीन गन्ने की बुवाई के लिए नवीन उन्नत किस्मों यथा को.षा 13235, 17231, 18231, 14233 को, लख-14201, 16202 को-15023 आदि की बुवाई करें। लाल सड़न रोग से संक्रमित किस्म को 0238 की बुवाई नही करें। पेड़ी भी नहीं लें। गन्ने की दो कतारों के बीच इस समय मूंग की एक कतार लगा सकते हैं।
भिंड़ी के लिए यह करें
ग्रीष्म्कालीन भिंडी की बुवाई के लिए प्रजाति पूसा 4 का चुनाव करें। बीज को बुवाई के 24 घंटे पहले पानी में भिगो दें। भिंडी की बुवाई 30 से 35 सेमी की दूरी पर कतारों में करें। 18-20 किग्रा. बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होगी। 100 से 120 किग्रा. नाइट्रोजन, 50 किग्रा. फास्फोरस, 50 किग्रा. पोटाश प्रति हेक्टेयर में प्रयोग करें। इसके अलावा अमरूद, आंवला, के नए बाग में टमाटर, भिंड़ी, मिर्च, लोभिया की बुवाई करें।