शामली। अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह और नवंबर माह के पहले सप्ताह तक आलू की विभिन्न किस्मों की बुवाई की जा सकती है। आलू की उन्नत किस्मों की बुवाई कर किसान अधिक आमदनी पा सकते हैं। कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ किसानों को बुवाई से पूर्व मिट्टी की जांच कराने की सलाह दे रहे हैं।
जिले में गन्ने, सरसों, गेहूं के अलावा आलू की खेती भी व्यापक स्तर पर की जाती है। शामली के अलावा जलालाबाद, थानाभवन, कांधला क्षेत्र में किसान आलू की खेती करते हैं।
जिला कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डाॅ. संदीप चौधरी के अनुसार, मौसम का रुख देखते हुए वैसे तो सितंबर के अंत से ही आलू की खेती का काम शुरू हो जाता है। मगर अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक बुवाई की जाती है। कई किसान 15 नवंबर से 25 दिसंबर के बीच तक आलू की पछेती बुवाई भी करते हैं।
इस बुवाई से पहले खेत की मिट्टी को जैविक विधि से तैयार किया जाता है, जिससे आलू की अच्छी पैदावार मिल सके। इसके अलावा बीजों का उपचार करके भी आलू की फसल में नुकसान की संभावनाओं को कम किया जा सकता है।
n आलू की बुवाई से पहले करें खेत की तीन गहरी जुताई : आलू शीतकालीन फसल है। इसके जमाव व शुरू की बढ़वार के लिए 22 से 24 डिग्री सेल्सियस व कंद के विकास के लिए 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। खेत की तैयारी के लिए तीन से चार गहरी जुताई करके मिट्टी अच्छी प्रकार से भुरभुरी बना लें व बुवाई से पहले प्रति एकड़ 55 किलो यूरिया, 87 किलो डीएपी या 250 किलो सिंगल सुपर फास्फेट व 80 किलो एमओपी को मिट्टी में मिला दें।ो