यूक्रेन की करेंसी खत्म, हॉस्टल में फंसा है हिमांशु
पोल्टावा में रह रहे ऊंचागांव निवासी छात्र हिमांशु के बड़े भाई रजत चौहान ने कहा कि सरकार केवल उन्हीं छात्रों को ला रही हैं। जो बॉर्डर के नजदीक हैं। उन्होंने मांग की है कि भारत सरकार को यूक्रेन के अंदर अलग-अलग स्थानों पर फंसे छात्रों को भी बाहर निकलवाना चाहिए। उसकी दिल्ली मंत्रालय के हेल्पलाइन नंबर पर बात हुई थी। उसने अपने भाई के खाते में नकदी डाली थी, लेकिन एटीएम में पैसा नहीं बचा है।
हंगरी बॉर्डर तक जाने के लिए करेंसी की जरूरत
हिमांशु चौहान ने बताया कि हॉस्टल के अंदर 500 भारतीय छात्र भी फंसे हुए हैं। हॉस्टल से हंगरी बॉर्डर तक बस में जाने के लिए यूक्रेन की करेंसी 2500 ग्रेवियन यानी के इंडिया के साढ़े सात हजार रुपये प्रति छात्र के हिसाब से मांगे जा रहे हैं। करीब 50-60 छात्र बस से हंगरी बॉर्डर तक पहुंच गए हैं। लेकिन उनके पास यूक्रेन की करेंसी नहीं हैं।
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एडमिशन कराने वाले एजेंटों ने दिया आश्वासन
हिमांशु ने व्हाट्सएप पर बताया कि जिस एजेंट ने यूनिवर्सिटी में दाखिला कराया था। वे हॉस्टल में आए थे। सभी भारतीय छात्रों की सूची बनाई थी। उन्होंने बताया कि दो-तीन दिन बाद बस से उनको किसी न किसी बॉर्डर पर पहुंचा दिया जाएगा।