जलालाबाद में रामलीला का मंचन करते कलाकार
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जलालाबाद। कस्बे में दो स्थानों पर चल रही रामलीलाओं का समापन भगवान श्री रामचंद्र के राजतिलक के साथ हो गया। रावण पर विजय प्राप्त कर राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, अयोध्या लौटे, अयोध्या में गुरु वशिष्ठ, भरत जी ने नगर के बाहर ही सभी नगर वासियों के साथ उनका स्वागत किया तथा ढोल नगाड़ों के साथ राज महल में प्रवेश किया। पंचायती रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने रामायण वाचक पंडित प्रणव भारद्वाज को व्यास सम्मान प्रदान किया। रामलीला निदेशक देवराज जुनेजा को मंच की ओर से पगड़ी व अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। रामलीला के सभी कलाकारों को प्रशस्ति पत्र व उपहार देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम समापन पर मामचंद विश्वकर्मा, लाला मांगेराम, लाला प्रमोद कुमार, राज कुमार रोहिल्ला, सुनील कुमार, मिठ्ठन लाल भटनागर, प्रधान लालू भटनागर, मौसम कश्यप, लालचंद, छोटन आदि कलाकार मौजूद रहे।
दुर्गा देवी मेला न लगने से श्रद्धालु मायूस
जलालाबाद। कस्बे में 10 दिवसीय दुर्गा देवी मेला इस वर्ष ने लगने से दूरदराज से लेकर क्षेत्रीय जनता को मायूस होना पड़ रहा है। कस्बे में दुर्गाष्टमी से लेकर शरद पूर्णिमा तक 10 दिनों तक वर्षों से मेला लगता चला आ रहा हैं। जिसमें क्षेत्र के दूरदराज से हजारों दर्शनार्थी मां दुर्गा मंदिर में आकर दर्शन कर अपनी मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर समिति के पदाधिकारी उपेंद्र गुप्ता का कहना है कि इस बार प्रशासन से मेला लगाने की अनुमति नहीं मिल पाई, जिस कारण मेला नहीं लगाया गया।
रामकथा में भजनों पर झूमे श्रद्धालु
गढ़ीपुख्ता। क्षेत्र के गांव राझड़ में मंदिर में चल रही रामकथा में मुकेश महाराज ने कहा श्रीराम जी हर किसी के आश्रम में नहीं आते है। जिस मनुष्य के अंदर काम क्रोध और लोभ नहीं, वही व्यक्ति अत्री हो सकता है। जब जीव बन जाता है अर्थात काम, क्रोध और लोभ का त्याग करके सतमार्ग पर चलता है। तब जीव के जीवन में राम रूपी सुख आता है। महाराज की पुत्री देवयानी ने भजन गाकर भक्तों को झूमने पर विवश कर दिया। इस दौरान कथा में अशोक, शिवकुमार, देवेंद्र, बाबू राम, राकेश कश्यप, रोशन कश्यप आदि लोगों का सहयोग सराहनीय रहा।