खुलासा किया था कि गिरोह के सदस्य चंद रुपयों के लालच में यूपी के अलावा हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और अन्य राज्यों के अधिकारियों की लोकेशन शेयर करते हैं, जिसके कारण राजस्व का चूना सरकार को लग रहा है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद एसपी अभिषेक ने मामले की जांच कैराना थाना प्रभारी को सौंपी थी।
एसपी अभिषेक ने बताया कि अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर मामले की जांच कराई गई। पता चला कि सबका साथ सबका विकास नामक ग्रुप में लोकेशन शेयर करने का खेल चल रहा है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के सरगना शामली के टटौली के रहने वाले वसीम पुत्र रईस को गिरफ्तार कर लिया। जिसके कब्जे से एक कार, मोबाइल भी बरामद किया गया।
जांच में पता चला कि 91 और लोग ग्रुप में शामिल है, जिनमें ट्रक चालकों के अलावा ट्रक मालिक भी हैं। सभी 92 के खिलाफ आईपीसी की धारा धारा 186 और 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पांच साल से चल रहा था अधिकारियों की लोकेशन शेयर करने का खेल
ग्रुप में 92 सदस्य हैं। लोकेशन शेयर करने के बदले चालक और मालिकों से यूपीआईडी के माध्यम से 1 हजार से लेकर 1500 रुपये लिए जाते थे। मांगने पर इस ग्रुप में जनपद मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत तथा हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, कर्नाटक राज्य के अधिकारियों की लोकेशन उपलब्ध कराई जाती थी।
लोकेशन के अनुसार वाहन चालक अधिकारियों से बचने के लिये गाड़ी को सुरक्षित स्थान पर खड़ी कर लेते हैं तथा अधिकारियों के जाने के बाद वाहन को गंतव्य तक ले जाने की सूचना देते थे। गिरोह के सरगना ने खुलासा किया कि वह पिछले 5 साल लोकेशन शेयर कर रहे थे।
इन जिलों और राज्यों के लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया मुकदमा
मुजफ्फरनगर के 36, बागपत के 20, गाजियाबाद के 9, शामली के 4, सहारनपुर के 4, मेरठ के 2, हापुड़ के 1, हरियाणा के 3, दिल्ली के 6, पंजाब, कर्नाटक, उत्तराखंड के 1-1 और बाकी अन्य, जिनका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।