शामली। पाबंदी हटने के बाद हरियाणा-उत्तराखंड क्षेत्रों के स्टोन क्रशर से रोड़ी, बजरी की आपूर्ति शुरू हो गई है। प्रतिदिन 80-90 गाड़ियों से रोड़ी, बजरी हाईवे निर्माण के लिए आ रही है। इसकी आपूर्ति होने से दिल्ली-सहारनपुर हाईवे और शामली बाईपास की निर्माण कार्य की राह आसान हो गई है।
पिछले दस साल से दिल्ली-शामली, सहारनपुर हाईवे और शामली बाईपास का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। जिले में इस साल हाईवे निर्माण कार्य में तेजी आने से निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद बंधी है। पिछले डेढ़ माह पूर्व हरियाणा-उत्तराखंड में पाबंदी होने के कारण रोड़ी बजरी न आने से हाईवे का निर्माण का कार्य प्रभावित हो गया था। पिछले 10 दिनों से हरियाणा के चरखी-दादरी, यमुनानगर, सहारनपुर के ताजेवाला और उत्तराखंड केे रायवाला अनुमति मिलने के बाद स्टोन क्रशर से रोड़ी बजरी काम माल आना शुरू हो गया है। निर्माण एजेंसी प्रोजेक्ट मैनेजर जितेंद्र बालियान का कहना है कि 10 दिसंबर के बाद हरियाणा के चरखी-दादरी, यमुनानगर, सहारनपुर के ताजेवाला और उत्तराखंड केे रायवाला प्रति दिन 80- 90 ट्रकों से माल आना शुरू हो गया है। जिससे हाईवे और बाईपास के निर्माण कार्य में तेजी आएगी।
अफसरों के मुताबिक दिसंबर के दस दिन और जनवरी के दस दिन मिलाकर 20 दिन बाद नए साल में 10 जनवरी के बाद दिल्ली-शामली, सहारनपुर मार्ग का काला करने का काम शुरू करेंगे। इससे पूर्व शामली-सहारनपुर मार्ग को दोनों ओर रोड़ी बजरी डालकर कार्य पूरा किया जाएगा। नए साल में दिल्ली-शामली, सहारनपुर मार्ग पर पहले चरण में बलवा गांव से लेकर मेरठ-करनाल मार्ग पर ताजपुर सिंभालका तक शामली बाईपास पर रोड़ी बजरी का कार्य शुरू हो जाएगा। अप्रैल में तारकोल डालकर काला करने का काम शुरू होगा।
एलम बाईपास का दो किमी काला करने का कार्य पूरा
शामली। दिल्ली-शामली, सहारनपुर मार्ग की निर्माण का कार्य देख रही मेरठ की कृष्णा कंपनी के जितेंद्र बालियान ने बताया कि एलम में पश्चिमी दिशा में बाईपास प्रस्तावित है। एलम बाईपास का मिट्टी कार्य पूरा करने के बाद दो किमी तक रोड़ी बजरी और तार कोल डालकर काला करने का काम पूरा हो गया है। सर्दी कम होने के बाद एलम बाईपास का कार्य पूरा किया जाएगा। 2752 मीटर एलम बाईपास में 400 मीटर कार्य अधूरा है।