शामली/बनत। पिछले एक माह से लगातार हो रही बारिश ने जिले के ईंट भट्ठा उद्योग की कमर तोड़ दी है। बेमौसम बारिश और जलभराव के कारण जिलेभर के ईंट भट्ठों पर तैयार की गई लाखों कच्ची ईंटें खराब हो चुकी हैं। ईंट भट्ठा निर्माता समिति के अनुसार जिले के करीब 160 भट्ठों को अब तक 20 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
जिले में शामली, कैराना, थानाभवन, ऊन, जलालाबाद और आसपास के क्षेत्रों में करीब 160 ईंट भट्ठे संचालित हैं। प्रत्येक भट्ठे पर प्रतिदिन औसतन 70 हजार कच्ची ईंटें तैयार की जाती हैं। इन ईंटों को सुखाने के लिए खुले स्थानों पर रखा जाता है। बारिश के पानी में ये ईंटें गल गई और पथाई स्थलों पर पानी भर गया।
ईंट भट्ठा निर्माता समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र मलिक ने बताया कि पिछले एक माह में छह से अधिक बार तेज बारिश हो चुकी है। इससे प्रत्येक भट्ठे को 12 से 15 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है। जिलेभर में कुल नुकसान 20 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। यदि आने वाले दिनों में मौसम फिर खराब हुआ तो यह नुकसान और बढ़ सकता है।
समिति के पदाधिकारी सुनील मालैंडी, कृष्ण कुमार, विनोद प्रधान, बृजपाल, डॉ. इंद्रपाल, नीरज बालियान और योगेश ने कहा कि इस बार उद्योग को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने शासन-प्रशासन से अगले वर्ष की रॉयल्टी और जीएसटी में छूट देने की मांग की है।
दोहरी मार, काम बंद करने की आ सकती है नौबत
कारोबारियों ने बताया कि कोयला, मिट्टी, परिवहन और मजदूरी की लागत पहले ही बढ़ चुकी है। ऐसे में बारिश से हुए इस भारी नुकसान ने उद्योग को आर्थिक संकट में डाल दिया है। कई छोटे भट्ठा संचालकों के सामने काम बंद करने की नौबत आ सकती है।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि जल्द ही वे जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से मुलाकात कर नुकसान का सर्वे कराकर उद्योग को राहत पैकेज दिलाने की मांग करेंगे।
मजदूरों पर भी पड़ सकता है असर
भट्ठा मालिकों का कहना है कि यदि मौसम का यही हाल रहा तो उत्पादन प्रभावित होगा, जिसका असर मजदूरों के रोजगार पर भी पड़ेगा। जिले में हजारों मजदूर ईंट भट्ठा उद्योग पर निर्भर हैं। ऐसे में उद्योग को राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में मजदूरों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।