शामली। जिले के किसान रोटी के लिए गेहूं तो उगा लेते हैं, लेकिन दाल के लिए अन्नदाता भी बाजार पर निर्भर हैं। कभी अच्छे-खासे रकबे पर होने वाली दाल की खेती जिले में अब नाममात्र रह गई है। कुछ किसान दाल के नाम पर थोड़ी मसूर उगा लेते हैं या जायद के मौसम में थोड़ा उर्द बो लेते हैं।
जनपद में लगभग सवा लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है और किसान भी एक लाख 20 हजार हैं। 2011 में शामली जनपद बनने के बाद फसलों के रकबे, उत्पादन एवं उत्पादकता आदि आंकड़ों की गणना अलग होनी शुरू हुई। 2012-13 में जिले में दलहन का क्षेत्र 1323 हेक्टेयर था, जो अब सिमटकर एक हजार हेक्टेयर से भी कम रह गया है। जनपद के किसान केवल मसूर और उड़द ही उगा रहे हैं। जायद के सीजन में उड़द का रकबा लगभग 377 हेक्टेयर था, जबकि इस बार मसूर का रकबा लगभग 113 हेक्टेयर रहने की संभावना है।
किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक का कहना है कि आवारा पशुओं की वजह से किसानों ने दलहन की खेती करनी बंद कर दी है। किसान थोड़ी बहुत उड़द उगाते हैं। उसे भी पशुओं से बचाना मुश्किल रहता है। जलालाबाद क्षेत्र के किसान ओमप्रकाश सिंह, पंकज कुमार आदि का कहना है कि दलहन में नुकसान बहुत होता है। कई बार तो लागत भी नहीं निकल पाती।
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तिलहन के नाम पर केवल सरसों उगा रहे किसान
जिले में तिलहन के नाम पर केवल सरसों की खेती होती है। वह भी गेहूं, बरसीम आदि के साथ बोई जाती है। कुछ किसान केवल सरसों की खेती करते हैं। इसका रकबा डेढ़ हजार हेक्टेयर से ज्यादा नहीं हो पाता है। पिछले सीजन में जनपद में लगभग 400 मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन हुआ। जबकि तिल, सूरजमुखी, तरहा, अलसी आदि की खेती से जिले के किसानों ने पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है।
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बीते वर्षों में जनपद में दलहन का क्षेत्रफल
वर्ष रकबा हेक्टेयर
2015-16 -- 979
2016-17 --960
2017-18 -- 860
2018-19 --750
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बीते वर्षों में जनपद में तिलहन का क्षेत्रफल
वर्ष रकबा हेक्टेयर
2015-16 - 1200
2016-17 - 1165
2017-18- 1180
2018-19 - 1068
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कोट...
जनपद में दलहन का रकबा ज्यादा नहीं है। तिलहन में किसान सरसों ही ज्यादा उगाते हैं। जनपद के किसान गन्ना, गेहूं और धान का उत्पादन अधिक करते हैं। - डा. हरिशंकर सिंह, जिला कृषि अधिकारी।