शामली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्यता को लेकर दिए गए फैसले और सरकार की अस्पष्ट नीति के खिलाफ जनपद के शिक्षक संगठनों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। शनिवार को संयुक्त शिक्षक संघ द्वारा कार्यालय वित्त एवं लेखाधिकारी शामली पर बैठक आयोजित की गई, जिसमें शिक्षकों ने दमनकारी नीतियों के विरोध में आंदोलन की शुरुआत करने का संकल्प लिया।
बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि अब वे और उत्पीड़न सहन नहीं करेंगे। उन्होंने सरकार से स्पष्ट रुख की मांग करते हुए आर-पार की लड़ाई का एलान किया। इसके तहत, जनपद के शिक्षकों ने आंदोलन की चरणबद्ध रणनीति बनाई है।
आंदोलन की रूपरेखा
-22 फरवरी : दोपहर 2 से 4 बजे तक ट्विटर पर राष्ट्रव्यापी हैशटैग अभियान।
-23 से 25 फरवरी : शिक्षक काली पट्टी बांधकर स्कूलों में शिक्षण कार्य करेंगे।
-26 फरवरी : दोपहर तीन बजे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर विशाल धरना, जिसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च किया जाएगा और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा।
-मार्च का तीसरा सप्ताह : दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के शिक्षकों की महारैली और केंद्र सरकार का घेराव।
-सरकार से स्पष्ट नीति की मांग
शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने जनपद के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे इस आंदोलन में भाग लेकर अपने अधिकारों की रक्षा करें। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे अपने सम्मान और अस्तित्व के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और सरकार से टीईटी अनिवार्यता पर स्पष्ट और व्यावहारिक नीति की मांग करेंगे।