उमर शैफ, सोमपाल ने उठाया पर्यावरण-जल संरक्षण का बीड़ा
शामली। जिले में सामाजिक संस्थाओं ने प्रशासन की मदद से पर्यावरण-जल संरक्षण को बढ़ावा देने का बीड़ा उठाया है। सामाजिक संस्थाएं चाहती हैं कि यमुना और कृष्णा नदी निर्मल बनें। औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित पानी नदियों में न आए। गंदा पानी रोकने के लिए जिला प्रशासन इस पहल को बनाए रखे। यमुना और कृष्णा को निर्मल बनाने के लिए यमुना ग्राम सेवा समिति के अध्यक्ष सोमपाल सिंह और डाक्टर उमर शेफ आगे आए है। वैसे तो जिले में यमुना और कृष्णा नदी प्रदूषित होती जा रही है। हरियाणा के यमुनानगर- कला और सहारनपुर जिले की औद्योगिक इकाई का गंदा पानी यमुना को मैला कर रहा है।
गंदे पानी से मुक्त होकर निर्मल बने यमुना : सोमपाल
दिल्ली की जलसंरक्षण संस्था से जुड़े कैराना क्षेत्र के रामड़ा गांव के सोमपाल सिंह पिछले सात साल से यमुना ग्राम सेवा समिति गठित करके जलसंरक्षण का कार्य कर रहे है। पिछले साल यमुना किनारे पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया था। उनका लक्ष्य है कि यमुना शुद्ध और उसका पानी निर्मल हो। यमुना नदी गंदगी से मुक्त हो। हरियाणा और सहारनपुुर, शामली की औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी मुक्त हो।
एक साल बाद स्वच्छ कृष्णा नदी की कार्ययोजना का असर दिखाई देगा
जिले की कृष्णा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए पिछले चार साल से कार्य कर रहे पर्यावरणविद् डा. उमर शैफ 1998 में एमएससी विज्ञान- पर्यावरण विषय में अध्ययन करके हिंडन-कृष्णा, काली, और काठा नदी पर पर्यावरण संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। सहारनपुर जिले के रामपुर मनिहारन से निकली कृष्णा नदी का शामली जिले में पर्यावरण संरक्षण निर्मल कृष्णा बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये की लागत से 168 ग्राम पंचायत और दस नगर निकायों में कार्ययोजना तैयार करके बीड़ा उठाया है। उनका कहना है कि निर्मल कृष्णा अभियान का असर एक साल में असर जिले में दिखाई देगा। जलालाबाद के चंदेनामाल से लेकर एलम और भनेडा गांव तक कृष्णा नदी के किनारे पौधरोपण करके खेल के मैदान, पार्क विकसित किए जाने का सपना संजोए है। शहर के गंदे नाले और औद्योगिक इकाइयों का पानी रोककर करमू खेड़ी पूर्वी यमुना नहर से निर्मल धारा विकसित की है। उनका कहना हैैै कि जिला प्रशासन के सहयोग से कृष्णा नदी परियोजना कार्य का असर नजर आएगा।
डॉक्टर उमरसैफ- फोटो : SHAMLI