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धान की नई खरीद नीति हुई लागू

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शामली। नई धान खरीद नीति में इस बार किसान सप्ताह के पहले चार दिन सोमवार से बृहस्पतिवार तक 50 क्विंटल धान की बिक्री कर सकेंगे। शुक्रवार और शनिवार को किसान 50 क्विंटल से अधिक धान बेच सकेंगे। धान बिक्री के लिए किसान को जारी होने वाले टोकन की अवधि 15 दिन तक मान्य होगी। शाम चार बजे तक खरीद केंद्र पर धान लाने वाले किसानों से ही खरीद होगी।
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एक अक्तूबर से किसानों से सामान्य धान 1940 रुपये और ग्रेड ए 1960 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य पर जिला प्रशासन ने खरीद की तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला प्रशासन ने धान खरीद के लिए सात खरीद केंद्र बनाए गए है। खरीद केंद्रों में तीन केंद्र खाद्य विभाग, चार खरीद केंद्र पीसीएफ के शामिल है। किसान को धान बिक्री के लिए पहले अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के लिए किसान को आधार कार्ड में दिए मोबाइल का उल्लेख करना होगा। एक अक्तूबर से लेकर 31 जनवरी तक धान की खरीद की जाएगी।
शामली और मुजफ्फरनगर जिले के डिप्टी आरएमओ कमलेश कुमार ने बताया कि धान खरीद मूल्य में पिछले साल की अपेक्षा 72 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। इस साल सामान्य धान 1940 रुपये और ग्रेड वन 1960 रुपये प्रति क्विंटल पर किसानों से खरीदा जाएगा। शासन ने 17 सितंबर से नई धान खरीद नीति लागू कर दी गई है। एक अक्तूबर से लेकर 31 जनवरी तक धान की खरीद एजेंसियां करेंगी। जिले में अभी तक 22 किसानों ने पंजीकरण कराया गया है।
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धान खरीद केंद्रों की सूची
- खाद्य विभाग के खरीद केंद्र : कैराना, झिंझाना- थानाभवन
- पीसीएफ के खरीद केंद्र : मलकपुर, महावतपुर, कांधला, ऊन
कैसे कराएं पंजीकरण
धान बिक्री के लिए किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराया जाना आवश्यक है। पंजीकरण ई-उपार्जन पोर्टल पर शुरू हो चुके हैं। जिसके लिए कृषकों को खाद्य विभाग के पोर्टल- www.fcs.up.gov.in पर पंजीकरण कराना होगा। डीएम जसजीत कौर ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2021-22 में गेहूं विक्रय हेतु पंजीकरण कराया जा चुका है उन्हें भी दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता है। पंजीकरण के समय अपने आधार में फीड मोबाइल नंबर अंकित कराएं। जिससे एसएमएस से प्राप्त ओटीपी नंबर को भरकर पंजीकरण प्रक्रिया को पूर्ण कर सकें। पंजीयन प्रपत्र में अपना बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड, भूमि का रकबा, बोए धान का रकबा आदि सावधानी पूर्वक भरें। जिससे समय से सत्यापन हो सके। धान खरीद व भुगतान में असुविधा न हो। बिना पंजीयन के किसान सरकारी केंद्र पर अपना धान नहीं बेच पाएंगे।
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