वकीलों की मांग, हाई कोर्ट बेंच की स्थापना कराए सरकार
शामली। पउप्र में करीब 45 वर्ष से हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ता संघर्षरत हैं। इसके अलावा जिला बनने के 10 वर्ष बाद भी शामली में जिला एवं सत्र न्यायालय के कार्यालय और आवासीय भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। कैराना में अस्थायी तौर पर जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना की गई है। इसके चलते वादकारियों के साथ अधिवक्ताओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अब फिर से चुनाव आ गए हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के मुद्दे क्या हैं, आइए जानते हैं...
वर्ष 2011 में शामली जिला बना था। लेकिन अभी तक भी जिला एवं सत्र न्यायालय के लिए धन की व्यवस्था नहीं हुई है। जिससे अधिवक्ताओं और वादकारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। शामली कृषि पर आधारित जिला है। गन्ना किसानों का भुगतान 15 दिन में किया जाना चाहिए - राकेश कुमार शर्मा, अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन।
शामली जनपद बनने के दस साल बाद भी यह जिला पूर्ण रूप से स्थापित नहीं हो पाया है। तमाम महकमों के कार्यालय भी अभी तक स्थापित नहीं हुए हैं। जिला एवं सत्र न्यायालय का निर्माण होना है, लेकिन सरकार ने इसका बजट जारी नहीं किया। आगामी सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए - विजेंद्र कुमार, पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन।
पउप्र में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना जरूरी है। जिससे इस क्षेत्र के लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय मिल सके। पउप्र में हाई कोर्ट बेंच न होने से वादकारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अधिवक्ताओं और प्रदेश की जनता की यह मांग कई वर्ष पुरानी है। अगली सरकार ऐसी हो जो जनता के हित में कार्य करे - रतन सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन।
मुख्यालय पर जिला एवं सत्र न्यायालय और जिला कारागार समेत कई विभागों के कार्यालयों का निर्माण नहीं हो पाया है। जबकि इसके लिए भूमि आवंटित कर दी गई थी। जिसका खामियाजा जिले की जनता को भुगतना पड़ता है। जिस भी पार्टी की सरकार प्रदेश में बने, उसे इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए - ठाकुर रामपाल सिंह पुंडीर, पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन।
शामली जिले की स्थापना बसपा सरकार में हुई थी। इसके बाद जिले के आधारभूत ढांचे पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया। जिला एवं सत्र न्यायालय का भूमि आवंटित होने के बाद भी निर्माण नहीं हुआ है। सस्ता और सुलभ न्याय नागरिक के मूलभूत अधिकार है - नीलकमल, पूर्व महासचिव, जिला बार एसोसिएशन।
करीब 45 वर्ष से अधिवक्ता पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना के लिए संघर्षरत हैं। पिछले सालों में प्रदेश में कोई भी सरकार रही हो, अधिवक्ताओं की इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। किसी वाद के लिए महिला अधिवक्ताओं को यदि प्रयागराज जाना पड़ता है - उवर्शी, कार्यकारिणी सदस्य, जिला बार एसोसिएशन।
90 करोड़ रुपये बढ़ गया इस्टीमेट
जिला प्रशासन ने जिला न्यायालय और आवासीय भवनों के लिए पूर्वी यमुना नहर के किनारे गोहरनी गांव में नवीन मुख्यालय पर 50 एकड़ भूमि आरक्षित की थी। आरक्षित भूमि की चहारदीवारी 4.77 करोड़ रुपये में कराई गई। न्यायालय के कार्यालय एवं आवासीय भवनों के लिए पहले 208 करोड़ रुपये का इस्टीमेट उच्च न्यायालय इलाहाबाद को भेजा गया था। इसके बाद तत्कालीन डीएम अखिलेश कुमार सिंह ने उत्तर प्रदेश जल निगम गाजियाबाद की ओर 219 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनवाकर भिजवाया था। अब जिला प्रशासन ने लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड शामली की ओर से 298 करोड़ रुपये इस्टीमेट तैयार किया गया है। एस्टीमेट की राशि लगभग 90 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
ये निर्माण है प्रस्तावित
कार्यालय संख्या
डीजे कोर्ट 1
फैमिली कोर्ट 1
सीजेएम कोर्ट 1
एडीजे समेत अन्य कोर्ट 17
अधिवक्ताओं के चैंबर- अधिवक्ता संख्या के अनुसार
आवासीय भवनों का ब्योरा
डीजे आवास 1
एडीजे, सीजेएम आवास 16
स्पोर्ट्स कांप्लेक्स 1
ट्रांजिट हॉस्टल मानक के अनुरूप
बिजलीघर भवन 1
पीएसी बैरक भवन 1