कहा कि जब तक शरीर में जान रहेगी, पति की इच्छा को पूरा करने के लिए कांवड़ लाती रहेंगी। यही नहीं, भंड़ारा आयोजित कर अन्य लोगों से भी कांवड़ लाने की अपील करती हैं।
कृष्णा देवी ने अमर उजाला को बताया कि वह पहले अपने पति के साथ तीन बार कांवड़ लेकर आई थी। मगर करीब 38 साल पहले पति अचानक ही बीमार हो गए। जिस वजह एक साल वह पति के साथ कांवड़ लेकर नहीं आ सकी। पति की मौत हो गई, मगर पति ने मरने से पहले इच्छा जाहिर की कि वह जब तक जीवित रहते हरिद्वार से कांवड़ लेकर आते। मगर अब शायद मेरा अंतिम समय है, तुम वायदा करो कि मेरे स्थान पर हर साल जीवित रहने तक कांवड़ लाती रहोगी। कृष्णा ने पति को हर साल कांवड़ लाने का वायदा किया था।
कृष्णा ने बताया कि पति के वायदे को पूरा करने के लिए वह उनकी मौत के बाद 37 साल से लगातार कांवड़ लेकर आ रही हैं। कांवड़ लाने के बाद वह घर पर पहुंचकर भंड़ारा भी लगाती हैं। परिवार में बेटा, बेटी भी है। पति की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए वह जब तक शरीर में जान रहेगी, कांवड़ लाती रहेंगी।