फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झुलसा रोग से आलू की फसल को बचाएं किसान

विज्ञापन
विज्ञापन
शामली। जिले में आलू की अगेती और पिछेती फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए उद्यान विभाग की ओर से किसानों को जागरूक किया गया।
विज्ञापन

जिला उद्यान अधिकारी डॉॅ. हरित कुमार ने बताया कि आलू की अगेती एवं पछेती झुलसा रोग प्रतिकूल मौसम विशेषकर बूंदाबांदी एवं नम वातावरण में बहुत तेजी से फैलता है। जिससे आलू की फसल को भारी क्षति पहुंचती है। अगेती झुलसा रोग का प्रकोप निचली पत्तियों से शुरू होता है, जिसके फलस्वरूप गहरे भूरे व काले रंग के कुंडलाकार छल्लेनुमा धब्बे बनते हैं। जो बाद में बीच में सूखकर टूट जाते हैं। पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से आलू की फसल को विशेष क्षति होती है। इस रोग से पत्तियां सिरे से झुलसना शुरू होती है, जो तीव्रगति से फैलती है। आलू की अगेती-पछेती फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए कीट एवं रोगों का उचित समय पर नियंत्रण करना आवश्यक है।
अच्छी पैदावार के लिए समय से करें छिड़काव
आलू उत्पादक आलू की अच्छी पैदावार करने के लिए जिंक मैंगनीज कार्बामेट 2.0 से 2.5 किग्रा को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से पहला छिड़काव बुवाई के 30-45 दिन बाद अवश्य किया जाए। रोग के नियंत्रण हेतु दूसरा एवं तीसरा छिड़काव कॉपर आक्सीक्लोराइड 2.5 से 3.0 किग्रा अथवा जिंक मैंगनीज कार्बामेट 2.0 से 2.5 किग्रा में से किसी एक रसायन का चयन कर 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से 10-12 दिनों के अंतर पर करें। दूसरे एवं तीसरे छिड़काव के साथ ही मॉहू कीट का नियंत्रण आवश्यक है, क्योंकि इसके प्रकोप से आलू बीज उत्पादन प्रभावित हो सकता है। दूसरे व तीसरे छिड़काव में फफूदनाशक के साथ कीटनाशक रसायन जैसे डायमेथोएट 30 ईसी या मिथाइल-ओ-डेमेटान 25 ईसी 1.00 लीटर अथवा मोनोक्रोटोफास 36 ईसी 750 मिली को प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाकर छिड़काव किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

गुजिया एवं मिज कीट प्रकोप से आम की फसल बचाएं
शामली। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. हरित कुमार ने बताया कि नवंबर एवं दिसंबर माह में गुजिया एवं मिज कीट का प्रकोप शुरू होता है। जिससे फसल को काफी क्षति पहुंचती है। कीट को नियंत्रण के लिए बागों की जुताई- गुड़ाई करने समय से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। फेनिट्रोथियान 50 ईसी 1.0 मिलीलीटर अथवा डायजिनान 20 ईसी 2.0 मिलीलीटर अथवा डायमेथोएट 30 ईसी 1.5 मिली दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर बोर निकलने की अवस्था पर एक छिड़काव करें। गुजिया कीट के शिशु जमीन से निकल कर पेड़ों पर चढ़ते हैं। मुलायम पत्तियों, मंजरियों एवं फलों से रस चूसकर क्षति पहुंचाते हैं। शिशु कीट 1-2 मिमी लंबे एवं हल्के गुलाबी रंग के चपटे तथा मादा वयस्क कीट सफेद रंग के पंखहीन एवं चपटे होते हैं। दिसंबर के अंतिम या जनवरी के प्रथम सप्ताह से 15-15 दिन के अंतर पर दो बार क्लोरीपाइरीफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 250 ग्राम प्रति पेड़ के हिसाब से तने के चारों ओर डालना चाहिए। अधिक प्रकोप की स्थिति में यदि कीट पेड़ों पर चढ़ जाते हैं तो ऐसी दशा में मोनोक्रोटोफॉस 36 ईसी 1.0 मिली अथवा डायमेथोएट 30 ईसी 2.0 मिली दवा को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर आवश्यकतानुसार छिड़काव करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें