संवाद न्यूज एजेंसी
झिंझाना। मेरठ-करनाल हाईवे स्थित आयुष्मान हॉस्पिटल में डिस्चार्ज के समय बच्चे की अदला-बदली को लेकर हुए विवाद का घाव परिजनों के दिलों में अभी भी नहीं भरा है। सोमवार को अस्पताल में हंगामा होने के बावजूद मंगलवार को भी परिजनों को कोई ठोस समाधान नहीं मिल सका।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मामले को टालते हुए कहा कि तीन महीने बाद ही बच्चे की डीएनए जांच संभव है। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है। पीड़ित महिला पूजा के जेठ संजय ने बताया कि बुधवार को वे जिलाधिकारी शामली से मुलाकात कर अपनी व्यथा बताएंगे और न्याय की गुहार लगाएंगे।
करीब 15 दिन पहले झिंझाना के डेरा बिरालियान की महिला पूजा को प्रसव पीड़ा के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि महिला ने बेटे को जन्म दिया था, लेकिन डिस्चार्ज के समय अस्पताल स्टाफ ने उन्हें बच्ची सौंप दी।
इस विवाद से आहत परिजनों ने सोमवार को अस्पताल के बाहर हंगामा किया था और पुलिस को सूचना दी थी। परिजन बुआ जानकी और जेठानी कोमल का कहना है कि डिलीवरी के समय नर्स और स्टाफ ने लड़का होने की पुष्टि की थी और मिठाई तथा इनाम भी मांगा था, जो उन्हें दिया गया। वहीं, अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि महिला ने वास्तव में बच्ची को ही जन्म दिया है। जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी।