दरअसल, मुजफ्फरनगर के खरड़ गांव के रहने वाले अब्दुल कादिर परिवार के साथ गाजियाबाद के लोनी के न्यू विकासनगर कॉलोनी में रहते हैं। दो नवंबर 2022 को अब्दुल कादिर के बेटे कक्षा आठ में पढ़ने वाले फहीम ने रात करीब 10 बजे दिल्ली से शामली को जाने वाली 0499 ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला था। जिसमें छात्र ने मोमीन और हारिश और शाहबुद्दीन के कारण आत्महत्या की बात लिखी थी। मामले में मृतक के पिता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई थी। बाद में शाहबुद्दीन की मौत हो गई थी।
मामले की जांच में सामने आया है कि लोनी के जिन मोमीन और हारिश का नाम सुसाइड नोट में लिखा गया है, उनके नाम के दो और व्यक्ति हैं। सुसाइड नोट में मोमीन और हारिश के पिता का नाम, और पता नहीं लिखा था।
जीआरपी असमंजस में थी कि आरोपी कौन है, चारों में से दो असली आरोपियों का कैसे पता लगाया जाए। जिस पर शामली जीआरपी थाना प्रभारी धमेंद्र सिंधू ने मामले की जांच शुरू की। सच का पता लगाने के लिए कोर्ट से पॉलीग्राफी टेस्ट की अनुमति मांगी।
करीब एक माह पूर्व ही मोमीन, हारिश और अन्य का पॉलीग्राफी टेस्ट हुआ, जिसमें स्पष्ट नहीं हो सका कि छात्र ने आत्महत्या नामजद आरोपियों के कारण ही की थी। मृतक के परिजनों की मांग पर नार्को टेस्ट की अनुमति कोर्ट ने दे दी।
एसपी जीआरपी मुरादाबाद आशुतोष शुक्ला ने बताया कि नार्को टेस्ट के लिए चार आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है। अगले सप्ताह दिल्ली में आरोपियों का नार्को टेस्ट हो सकता है। जिसकी तैयारी जीआरपी ने पूरी कर ली है। आरोपी और वादी को भी मामले की जानकारी दी जाएगी। नार्को टेस्ट से ही दूध का दूध पानी का पानी होगा। पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाया जाएगा।
सुसाइड नोट में यह लिखा था
पुलिस प्रशासन मेरी बात पर गौर करे, बहला-फुसाकर शाहबुद्दीन मुझे ब्लैकमेल करता है। मारपीट की जाती है। हारिश और मोमीन ने मुझसे रुपये लिए हुए हैं मांगने पर मारपीट करते हैं और धमकी देते हैं। तीनों से डर के कारण घर छोड़कर आत्महत्या कर रहा हूं। किसी के कहने सुनने पर मेरे दोस्तों को परेशान नहीं किया जाए। मेरी मौत के जिम्मेदार ये तीनों है। इस मामले में शाहबुद्दीन की मौत हो चुकी है।
- छात्र फहीम
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पीड़ित पक्ष को जगी इंसाफ की आस
मृतक छात्र के पिता अब्दुल कादिर ने बताया कि मामले में पिछले काफी समय से कार्रवाई की मांग को लेकर जीआरपी के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। नार्को टेस्ट के आदेश के बाद अब पीड़ित पक्ष को इंसाफ की आस जग गई है। आरोप है कि आत्महत्या उक्त लोगों के कारण ही छात्र ने की थी। बेटे से साढ़े चार लाख रुपये और जेवरात भी आरोपियों ने छीन लिए थे। बेटा पढ़ने में भी काफी होशियार था।
टेस्ट करने के लिए लेनी पड़ती है अदालत से इजाजत
इंस्पेक्टर अक्षय कुमार के अनुसार, नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट करने के लिए कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है। अदालत गंभीर मामलों में अपराधियों को देखते हुए ही इस परीक्षण की अनुमति देता है।