शामली। विधानसभा चुनाव में जिले में तीनों विधानसभा सीटों पर आमने-सामने की टक्कर रही। किसी भी सीट पर कोई भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी के बीच कोई तीसरा नहीं आ पाया। ऐसे में भाजपा और गठबंधन प्रत्याशियों को छोड़कर शेष सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। किसी भी सीट पर बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी तक अपनी जमानत नहीं बचा पाए। कुल 24 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
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इस स्थिति में जब्त होती है जमानत
हर उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए एक तय रकम चुनाव आयोग में जमा करानी होती है, इसे ही जमानत राशि कहा जाता है। यदि कोई उम्मीदवार चुनाव में कुल मतों का छठवां हिस्सा भी हासिल नहीं कर पाता है, तो उसके द्वारा जमा कराई गई जमानत राशि आयोग जब्त कर लेता है। विधानसभा चुनाव में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को जमानत राशि के तौर पर 10 हजार रुपये होती है, वहीं अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को पांच हजार रुपये आयोग में जमा कराने होते हैं।
इसलिए होती है जमानत जब्त
चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक यदि कोई उम्मीदवार सीट पर पड़े कुल वोटों का 1/6 यानी 16.66% वोट भी नहीं ले पाता है, तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है। यानी किसी सीट पर एक लाख वोट पड़े और किसी उम्मीदवार को 16,666 से कम वोट मिलें, तो उसकी जमानत जब्त हो जाएगी। जिन उम्मीदवार को 1/6 से ज्यादा वोट मिल जाते हैं, उन सभी की जमानत राशि लौटा दी जाती है। यदि उम्मीदवार जीत जाए, भले ही उसे 1/6 से कम वोट मिले हों, तो भी उसे जमानत के पैसे लौटा दिए जाते हैं। इसके अलावा वोटिंग शुरू होने से पहले यदि किसी उम्मीदवार की मौत हो जाए, जिन उम्मीदवारों का नामांकन रद्द हो जाए या जो प्रत्याशी नामांकन वापस ले लें उन सभी की जमानत राशि भी लौटा दी जाती है।
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नोटा से हारे 30 में से 17 प्रत्याशी
शामली। विधानसभा चुनाव में जिले की तीनों विधानसभा सीटों से निर्दलीय समेत कुल 30 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन आधे से अधिक 17 उम्मीदवारों को नोटा से भी कम वोट मिले।
तीनों विधानसभा सीटों पर 2162 मतदाताओं ने किसी भी उम्मीदवार को पसंद नहीं किया और नोटा का बटन दबाया। मतदाता को कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं आ रहा है, तो निर्वाचन आयोग द्वारा यह व्यवस्था की गई है कि वह ईवीएम में नोटा का बटन दबा सकते हैं। इस बार जिले की तीन विधानसभा सीटों पर चुनाव हुआ तो मतदाताओं ने अपनी-अपनी पसंद के प्रत्याशियों के वोट किया। मगर इसमें कुछ मतदाताओं को प्रत्याशी रास नहीं आए और उन्होंने अपना वोट नोटा को देना पसंद किया।
तीनों विधानसभा में से मतदाताओं ने सबसे अधिक नोटा का प्रयोग शामली विधानसभा सीट पर किया। यहां 799 लोगों ने नोटा दबाया। यहां सात कांग्रेस के अय्यूब जंग और आम आदमी पार्टी के बिजेंद्र मलिक समेत सात उम्मीदवार नोटा से हार गए। इसके बाद थानाभवन विधानसभा सीट पर 789 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। यहां आम आदमी पार्टी के अरविंद देशवाल और एआईएमआईएम के इकराम समेत चार लोग नोटा से हार गए। कैराना सीट पर नोटा का प्रयोग करने वालों की संख्या 593 रही। यहां आम आदमी पार्टी की संगीता और आजाद समाज पार्टी के देवी सिंह समेत छह प्रत्याशी नोटा से हार गए।
कैराना विधानसभा सीट
प्रत्याशी पार्टी वोट
नाहिद हसन- सपा-131035
मृगांका सिंह- भाजपा-105148
राजेंद्र सिंह- बसपा- 2077
अखलाक-कांग्रेस-1522
नोटा-593
सेठपाल- निर्दलीय 409
हारून अली-निर्दलीय-315
इसरार-निर्दलीय-272
देवी सिंह-आजाद समाज पार्टी-248
विजय कुमार-निर्दलीय-186
संगीता-आम आदमी पार्टी-142
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शामली विधानसभा सीट
प्रसन्न चौधरी-रालोद 103070
तेजेंद्र निर्वाल-भाजपा-95963
बिजेंद्र मलिक-बसपा-8183
नोटा-799
मोहम्मद अय्यूब जंग-कांग्रेस-780
आसिम-निर्दलीय-642
ललित कुमार-निर्दलीय-498
सुनीता देवी-सर्वजन लोकशक्ति पार्टी-439
बिजेंद्र मलिक-आम आदमी पार्टी- 258
धुरेंद्र सिंह- निर्दलीय-222
अजय-निर्दलीय-98
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थानाभवन विधानसभा सीट
अशरफ अली खान-रालोद-103751
सुरेश राणा- भाजपा-92945
जहीर मलिक-बसपा-11039
शेरपाल उर्फ शेर सिंह-निर्दलीय-3975
राकेश कुमार- आजाद समाज पार्टी-3188
सत्य संयम सैनी- कांग्रेस-793
नोटा-789
सद्दाम-एसडीपीआई-703
अरविंद देशवाल- आम आदमी पार्टी-674
रमा आदिल- निर्दलीय-359
इकराम-एआईएमआईएम-325