11 साल बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम जिला
शामली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली समेत पांच जिलों में मेडिकल सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। ताकि इन जिलों में कोरोना संक्रमितों को बेहतर इलाज मिल सके, लेकिन जनपद का स्वास्थ्य विभाग विशेषज्ञ चिकित्सकों और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।
28 सितंबर 2011 को शामली को जनपद बनाया गया था। जनपद बने हुए करीब 11 साल हो गए हैं। पिछले साल जिला संयुक्त चिकित्सालय का भवन तैयार होकर स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया गया था। इसके साथ ही शासन स्तर से चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ के पद स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं होने से जिला संयुक्त चिकित्सालय चालू नहीं हो सका। ऐसे में मरीजों को जनपद में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। गंभीर रोगियों को उपचार कराने के लिए दूसरे शहरों में या प्राइवेट अस्पतालों की तरफ रुख करना पड़ता है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जनपद में मौजूद डाक्टरों, स्टाफ और संसाधनों से मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है।
39 करोड़ की लागत से तैयार हुआ भवन
जिला मुख्यालय पर मुंडेट नहर पटरी किनारे जिला संयुक्त चिकित्सालय का निर्माण 2014 में शुरू हुआ था। करीब 39 करोड़ रुपये की लागत से पिछले साल भवन का निर्माण कार्य पूरा हुआ था। कोरोना संक्रमण बढ़ने पर पिछले साल से जिला संयुक्त चिकित्सालय के भवन में कोविड एल-1 व एल-2 अस्पताल चालू किया गया है। कोविड एल-2 अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से 14 वेंटीलेंटर में मात्र पांच वेंटीलेटर ही सेफ मोड पर चालू किए गए हैं।
चिकित्सकों व स्टाफ के 127 पद स्वीकृत
जिला अस्पताल के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, चिकित्सा अधीक्षक, फिजिशियन, चेस्ट फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलोजिस्ट, स्किन, निश्चेतक, जनरल सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन, ईएनटी सर्जन, नेत्र सर्जन, ईएमओ, दंत सर्जन, कार्डियोलोजिस्ट, पैथोलोजिस्ट व अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ सहित 127 पदों की स्वीकृति शासन स्तर से मिल चुकी है, लेकिन मुख्य चिकित्साधीक्षक के पद को छोड़कर बाकी किसी पद पर चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो सकी।
सीएचसी में चल रहा जिला अस्पताल
जिला संयुक्त चिकित्सालय चालू न होने पर सीएचसी शामली को जिला अस्पताल के रूप में चलाया जा रहा है। हालांकि यहां पर जिला अस्पताल जैसी पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली चल रहे हैं। मुख्य रूप से जनरल सर्जन, कार्डियोलोजिस्ट, गायनोलोजिस्ट, चर्म रोग विशेषज्ञ, चेस्ट फिजिशियन, आदि के पद खाली हैं। सीएचसी में अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है। इसके अलावा जिले में अभी तक बर्न यूनिट है और न ही ब्लड बैंक है। सीएचसी में केवल रक्त संग्रह केंद्र है, जिसमें गर्भवती महिलाओं के लिए रक्त स्टोर रहता है। गंभीर रूप से घायलों व बीमार लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जाता है।
कोट...
जिला संयुक्त चिकित्सालय में कोविड अस्पताल चल रहा है। 12 महिला व 22 पुरुष चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ के पद शासन से स्वीकृत हो चुके है। चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए शासन को पतक्र भेजा गया है। चिकित्सकों की नियुक्ति होने पर जिला अस्पताल और कोविड अस्पताल दोनों में बेहतर उपचार सुविधा बढ़ेगी। पैथोलोजिस्ट व लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति न होने से जांच की सुविधा नहीं है। जनपद में मौजूदा संसाधनों, डाक्टरों और स्टाफ के सहयोग से मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा दी जा रही है। - डॉ. सफल कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल।