जांच में प्रधानाध्यापक की पदोन्नति में पाया फर्जीवाड़ा
शामली। उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर प्रोन्नति पाने के लिए एक शिक्षक द्वारा कागजों में हेराफेरी किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। खंड शिक्षा अधिकारी की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होने पर प्रधानाध्यापक पद पर किया गया प्रमोशन रद्द करते हुए पदावन्नत करने, अनुचित रूप से लिए गए धन की रिकवरी करने और गलत सूचनाएं उपलब्ध कराने के कारण आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की है।
उच्च प्राथमिक विद्यालय ताना विकास क्षेत्र ऊन के गलत प्रमोशन की शिकायत अजय कुमार द्वारा की गई थी, जिसकी जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा ऊन के खंड शिक्षा अधिकारी योगेश कुमार गुप्ता को सौंपी गई। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई जांच में पता चला कि राजबीर सिंह की प्रथम नियुक्ति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी टिहरी गढ़वाल द्वारा अखेटी/कोटी (हिंदाऊ) में सहायक अध्यापक के पद पर 4 सितंबर 1991 के आदेश द्वारा की गई थी। बाद में इनकी पदोन्नति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी टिहरी गढ़वाल नई टिहरी द्वारा 30 सितंबर 2000 द्वारा सहायक अध्यापक माध्यमिक विद्यालय गैर नगुण विकास क्षेत्र धौलधार में की गई।
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद के 25 जुलाई 2005 के आदेश पर राजबीर सिंह का स्थानांतरण उत्तराखंड से मुजफ्फरनगर में किया गया, जिस पर उन्होंने 26 मई 2007 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्यभार ग्रहण कर लिया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुजफ्फरनगर ने राजबीर सिंह को 17 अगस्त 2007 को उच्च प्राथमिक विद्यालय जंधेडी विकास क्षेत्र शामली में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती दी, जहां उन्होंने 18 अगस्त 2007 को कार्यभार ग्रहण कर लिया। साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया कि जनपद में वरीयता सूची में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि ही मानी जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 15 अप्रैल 2010 को राजबीर सिंह को पदोन्नति देते हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय पुरमाफी में प्रधानाध्यापक के पद पर दे दी गई। जहां से 30 जून 2010 को राजबीर सिंह को प्रधानाध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय ताना विकास क्षेत्र ऊन में दी गई। आरोप है कि जिस समय कार्यालय खंड शिक्षा अधिकारी ऊन से पदोन्नति हेतु वरीयता सूची जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजी गई। उस समय राजवीर सिंह ब्लाक समन्वय के पद पर कार्यरत थे।
राजवीर सिंह पर वरीयता सूची में फर्जीवाड़ा करते हुए अपनी वरीयता तिथि में परिवर्तन किया। जबकि शासनादेश के अनुसार उत्तर प्रदेश में स्थानांतरण होने पर जनपद में नियुक्ति तिथि को ही अध्यापक की वरीयता माना जाता है, जो कि उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि 26 मई 2007 मानी जाती, लेकिन राजबीर सिंह ने वरीयता तिथि 30 सितंबर 2000 दर्शाई हैं। जबकि शामली और मुजफ्फरनगर में वर्ष 2000 तक के उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक की पदोन्नति उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक पद पर की गई हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी ऊन योगेश कुमार गुप्ता ने राजबीर सिंह प्रधानाध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय ताना को अपने पद का दुरुपयोग करने के लिए गलत सूचना उपलब्ध कराते हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर प्रमोशन लेने का दोषी पाते हुए तत्काल पदावनत सहायक अध्यापक पद पर करने तथा प्रमोशन की तिथि से वर्तमान तक अनुचित लाभ लिए गए धन की रिकवरी करने की संस्तुति की हैं।
-वर्जन-
शाम के समय संस्तुति पत्र मिला है। सोमवार तक उस समय किया गया आदेश के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की जाएगी। जिसके बाद ही पदोन्नति में फर्जीवाड़ा साबित होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। --चंद्रशेखर बेसिक शिक्षा अधिकारी