तीतरों। मृत्यु एक अटल सत्य है, लेकिन जीवन के बाद की कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं, जो अपनों को विदा करने का आखिरी संस्कार मानी जाती हैं। हिंदू धर्म में मान्यता है कि तीज्जे के दिन मृतकों की अस्थियां एकत्र कर गंगा में विसर्जित की जाती हैं, लेकिन मजबूरी ऐसी कि तीनों बच्चों की अस्थियां पोटली में पेड़ पर टांगनी पड़ गई।
दरअसल, मंगलवार को हत्यारे योगेश के तीनो बच्चों का तीज्जा था। सुबह उनकी अस्थियां चुगकर गंगा में प्रवाहित की जानी थी। इसी बीच सोमवार शाम योगेश की पत्नी नेहा की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। मंगलवार को जब नेहा का अंतिम संस्कार किया गया, तो पहले से एकत्र तीनों मासूम बच्चों की अस्थियां श्मशान घाट पर एक पेड़ की शाखा पर टांगनी पड़ीं।
निर्णय लिया गया कि चारों की अस्थियां एक साथ प्रवाहित की जाएंगी। क्योंकि परिवार में इतने सदस्य नहीं हैं, जो ऐसे दर्दनाक माहौल में बार-बार हरिद्वार जा सके। यही नहीं, चिता की राख भी वहीं एकत्र कर दी गई, ताकि बाद में सभी संस्कार एक साथ पूरे किए जा सकें।
श्मशान में टंगी अस्थियां और राख का ढेर एक मूक गवाही दे रहा था कि यह परिवार किस पीड़ा से गुजर रहा है। चचेरा भाई अक्षय, उनकी मां मीना, भाई हेमंत रोहिला और पूरा परिवार नेहा, श्रद्धा, देवांश और शिवांश की मौत के सदमे में ऐसा टूट चुके हैं कि अब भी उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनके अपने इस दुनिया में नहीं रहे। गांव का हर शख्स इस दृश्य को याद कर सिहर रहा है। (संवाद)