कैराना। दिनदहाड़े हरियाणा प्रदेश के रोहतक में कचहरी परिसर में गोलियां चल गई। फायरिंग में अधिवक्ता भी घायल हो गए। इस घटना के बाद से कचहरी
में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के दावे केवल कागजों के पेट भरने के लिए है।
कैराना में भी अदालतों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था रामभरोसे है। कचहरी के गेटों पर कोई पुलिसकर्मी तैनात नहीं होता। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में चूक होने से कचहरी परिसर में कभी भी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश फरार हो सकते हैं।
कैराना में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, सिविल जज सीनियर डिवीजन, सिविल जज जूनियर डिवीजन, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, दो अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन की कोर्ट, इसके अलावा दो फास्ट ट्रैक कोर्ट है, जिनमें अभी कोई भी पीठासीन अधिकारी तैनात नहीं है। कैराना की अदालतों में मुकीम गैंग, पंजाब की नाभा जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड सहित अन्य कुख्यातों की पेशी होती है। इनकी पेशी के दौरान कचहरी परिसर में इनके परिजन भी आते हैं।
कई गैंग होने के चलते इनमें गैंगवार की भी आशंका बढ़ जाती है, लेकिन कैराना कचहरी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं है। हालांकि पुलिस विभाग ने अधिकारियों की सुरक्षा के लिए बाकायदा एक एसआई के नेतृत्व में पीएसी के आठ जवान तैनात किए हुए है, लेकिन यह नाकाफी है। कचहरी परिसर में जाने के लिए दो गेट हैं। दोनों ही गेटों पर बेरोकटोक व्यक्ति आ जा सकते हैं। क्योंकि इन गेटों पर न तो मेटल डिटेक्टर है और न ही यहां पर कोई पुलिसकर्मी तैनात है जो आने जाने वालों की जांच कर सके।
पुलिस चौकी के लिए भेजा था प्रस्ताव
कैराना। कोर्ट परिसर में एक चौकी बननी चाहिए, इससे अदालत परिसर की सुरक्षा भी रहेगी। बाकायदा इसके लिए बार एसोसिएशन की ओर से चौकी भवन व्यवस्था कराने का प्रस्ताव दो माह पूर्व भेजा जा चुका है।
आंखों में धूल झोंककर भाग चुके हैं कई मुल्जिम
कैराना। कचहरी परिसर सुरक्षा के लिहाज से फिलहाल सुरक्षित नहीं है। क्योंकि यहां से पेशी पर आए कैदी कई बार पुलिस की आंखों में धूल झोंककर भाग चुके हैं। कचहरी परिसर में वादकारियों में आपस में कहासुनी भी हो चुकी है।