शामली। जिले में कुछ व्यापारी जीएसटी में गड़बड़ी कर रहे हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि करीब एक हजार कारोबारियों ने अपने वास्तविक कारोबार की जानकारी छिपाकर शून्य जीएसटी रिटर्न दाखिल किया है। राज्य कर विभाग ने ऐसे कारोबारियों की सूची तैयार कर ली है और वह इन्हें जल्द ही नोटिस भेजने की तैयारी में है। इसके साथ ही, विभाग अब एक जागरूकता अभियान भी चलाएगा ताकि व्यापारी गलत रिटर्न दाखिल करने से बचें।
विभागीय अधिकारियों की जांच में सामने आया है कि शामली के रेलवे रोड निवासी व्यापारी राजबीर के नाम से जीरो रिटर्न दाखिल किया गया था, जबकि जनवरी–फरवरी में उसके वास्तविक कारोबार का आंकड़ा पांच लाख रुपये से अधिक पाया गया। इसी तरह कैराना निवासी मुनीर ने शून्य रिटर्न दाखिल किया है। शामली के दिल्ली रोड के मनोज कुमार, सचिन कुमार और पंकज कुमार के नाम से भी जनवरी, फरवरी व मार्च में शून्य रिटर्न दाखिल पाए गए हैं। ये मामले तो बानगी भर मात्र है।
विभागीय अधिकारी बताते हैं कि प्रारंभिक जांच से स्पष्ट हुआ है कि कुछ कारोबारी जानबूझकर वास्तविक लेन-देन छुपा कर टैक्स बचाने के प्रयास कर रहे हैं। पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए चार जांच टीमों को व्यापारियों के बैंक लेन-देनों, खरीद-बिक्री के बिल, खातों व अन्य दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल का जिम्मा दिया गया है।
जीएसटी उपायुक्त डॉ. लोमेश कुमार ने बताया कि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर विभाग आपराधिक व सिविल दोनों तरह की कार्रवाई करेगा। दोषी पाए जाने पर नोटिस, जुर्माना और आवश्यकतानुसार रजिस्ट्रेशन रद्द करने जैसे कदम उठाए जाएंगे। साथ ही विभाग शून्य रिटर्न के सही उपयोग और गलत प्रथाओं से बचने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाएगा।
विशेषज्ञ की राय
जीएसटी के मामलों के जानकार और एक्सपर्ट सीए आकाश गुप्ता ने बताया कि शून्य जीएसटी रिटर्न भरना हमेशा सुरक्षित नहीं होता है। कई व्यापारी हर माह सुविधा के लिए जीरो जीएसटी रिटर्न भर देते हैं। भले ही कुछ लेनदेन हुआ है। यह आदत आगे चलकर गंभीर परिणाम दे सकती है।
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यह होता है जीरो रिटर्न
सीए के अनुसार जब किसी माह में बिक्री, खरीद या व्यापारिक गतिविधि शून्य हो तो जीरो रिटर्न भरा जाता है।
यह केवल तभी सही है, जब वास्तव में कोई लेन-देन न हुआ हो। यदि लेन-देन हुआ हो और जीरो रिटर्न भरेंगे तो जुर्माना देना पड़ सकता है। लेन-देन हुआ है तो धारा 122 के अंतर्गत 10 हजार रुपये या कर राशि का 100 प्रतिशत तक जुर्माना भरना पड़ सकता है।
यह पड़ेगा फर्क
1. सप्लायर ने बिक्री दिखाई और आपने जीरो फाइल किया तो आईटीएसी मिलान में अंतर आ जाएगा, क्रेडिट ब्लॉक हो सकता है।
2. लगातार शून्य रिटर्न पर विभाग नोटिस भेज सकता है।
3. छह महीने लगातार जीरो रिटर्न भरने पर विभाग आपका जीएसटीआईएन कैंसिल कर सकता है।