चौसाना। खोड़समा में तालाबों का अस्तित्व हुक्मरानों की उदासीनता के चलते खत्म होने की कगार पर आ खड़ा हुआ है। 80 बीघे के रकबे मे फैले विशाल तालाब अब मात्र बीस बीघे के रकबे मे ही सिमटकर रह गए। शिकायतों के बावजूद तालाबों से कब्जा नहीं हटाया जा सका और न ही तालाबों के सुंदरीकरण की ओर कोई कदम उठाया गया।
खोड़समा गांव में एक तालाब 50 बीघा और दूसरा 30 बीघा रकबे का है। जो अतिक्रमण के कारण मौजूदा समय में मात्र बीस बीघा में ही सिमटकर रह गए। तालाबों की भूमि पर या तो किसी ने निर्माण कर लिया या फिर गोबर से बने उपले रखकर बिटौडे खड़े कर लिए। गांव के जनप्रतिनिधियों ने चुनावी नफा नुकसान को भांपते हुए अतिक्रमण होने दिया। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अफसरों से शिकायत की, लेकिन ढुलमुल रवैये के कारण प्राकृतिक ताल-तलैया को संरक्षित करने के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी तालाबों को संरक्षित करने व उनके अस्तित्व को बनाए रखने के आदेश दिए थे, लेकिन हुक्मरानों के लिए उसका कोई महत्व नहीं रहा। प्रदेश की बीजेपी सरकार ने भी अपनी मंशा साफ कर दी कि अवैध कब्जों पर सरकारी बुलडोजर चलेगा। लेकिन जनपद शामली के खोड़समा के लिए कोई भी सरकारी आदेश मायने नहीं रखते। तालाब पर प्रभावशाली लोगों ने मकान बना लिए। प्रशासन उसे कब्जा मुक्त नहीं करा सका।
कोट-
हमें तालाबों पर अवैध कब्जे की जानकारी नहीं है। खोडसमा में स्वामित्व योजना का कार्य प्रगति पर है। लेखपाल कार्य कर रहे हैं, जिनसे जानकारी कराई जाएगी और अवैध कब्जे को तहसीलदार को लगाकर कब्जामुक्त कराया जाएगा। सभी अवैध कब्जे पर बने मकानों को गिराया जाएगा। - वीशू राजा, एसडीएम ऊन।