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ब्लड बैंक को शासन की स्वीकृति का इंतजार

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शामली। जनपद को दस साल बाद भी ब्लड बैंक नहीं मिल पाया है। ब्लड बैंक की स्थापना न होने की मुख्य कारण जिला अस्पताल का चालू न होना बताया गया है। हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से शासन को ब्लड बैंक का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
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शामली को 28 सितंबर 2011 को जिला बनाया गया था। जिला बनने के बाद भी जिले को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाई है। 2014 में जिला अस्पताल के भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। लगभग साढ़े 39 करोड़ रुपये की लागत से पिछले साल भवन बनकर तैयार हो गया, लेकिन अभी तक जिला अस्पताल चालू नहीं हो पाया। शासन द्वारा स्वीकृत पदों पर चिकित्सकों व स्टाफ की नियुक्ति अभी नहीं हो पाई है। जिला अस्पताल चालू न होने पर ब्लड बैंक की सुविधा भी नहीं मिल पाई है। ब्लड बैंक न होने से गंभीर मरीजों व घायलों को दूसरे शहरों में जाने या प्राइवेट ब्लड बैंक से महंगा ब्लड खरीदने को मजबूर होना पड़ता है, तब तक मरीज की जान खतरे में रहती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि ब्लड बैंक का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलने पर ब्लड बैंक की सुविधा चालू हो जाएगी।
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गर्भवती महिलाओं की जरूरत के लिए बना रक्त संग्रह केंद्र
शामली। सीएचसी शामली में रक्त संग्रह केंद्र बनाया गया है। इस केंद्र पर केवल गर्भवती महिलाओं के लिए रक्त उपलब्ध रहता है। केंद्र पर चार तरह का ए पॉजिटिव, बी पॉजिटिव, एबी पॉजिटिव और ओ पॉजिटिव रक्त उपलब्ध रहता है। जरूरत के अनुसार मुजफ्फरनगर ब्लड बैंक से रक्त की यूनिट लाकर केंद्र मेें रखी जाती है। लैब टेक्नीशियन अभिषेक शर्मा ने बताया कि केंद्र में 40 यूनिट के लगभग रक्त उपलब्ध रहता है। हर महीने 40 से 45 यूनिट रक्त सप्लाई हो रहा है। उनका कहना है कि गर्भवती महिलाओं के अलावा आयुष्मान के लाभार्थी को रक्त उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा अगर सरकारी अस्पताल में किसी पुरुष को इमरजेंसी में जरूरत होती है तो चिकित्सक की मांग पर रक्त उपलब्ध कराया जाता है।
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