जलालाबाद में स्तिथ गौशाला में बंधी गाय
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थानाभवन। भले ही सरकार के आदेश के बाद सभी क्षेत्रों में अस्थाई गोशालाओं का गठन कर आवारा गोवंश को शरण दे गई हो, लेकिन गोशालाओं की हालत पर गौर करें तो वहां सबकुछ ठीक नहीं है। कहीं, पशुओं को पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है तो कहीं पीने के पानी की व्यवस्था ठीक नहीं है। गोशालाओं के संरक्षक बने ग्राम प्रधान व अन्य जिम्मेदार कम बजट का रोना पीट रहे हैं।
राज्य सरकार के आदेश के बाद खंड विकास कार्यालय की ओर से क्षेत्र में चंदेनामाल, गंदेवड़ा, जलालाबाद देहात, थानाभवन देहात, भंदौड़ा, नौजल-नौजली, बाबरी व बंतीखेड़ा गांव में अस्थाई गोशालाओं का निर्माण कराया था। सरकार ने प्रत्येक गोवंश के पालन-पोषण के लिए हर दिन तीस रुपये का बजट तय किया है। फिलहाल सात गोशालाओं में 559 गोवंश की देखभाल की जा रही है जबकि, भंदौड़ा गांव की गोशाला में एक भी गोवंश नहीं है। गोवंश की हालत पर ध्यान दें तो यहां उनके रख-रखाव की उचित व्यवस्था नहीं है। कहीं, पीने के पानी का अभाव तो कहीं टीन शेड का। इसके अलावा कई जगहों पर पर्याप्त चारा तो दूर गोवंश को समय पर साफ पानी भी नसीब नहीं हो पा रहा।
गोशालाओं के संरक्षक कम बजट का रोना रो रहे हैं। मसावी के प्रधान प्रतिनिधि रहीम ने बताया कि सरकार का बजट कम है। इसलिए मात्र तीस रुपये में गोवंश का संरक्षण करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार को इस बजट में वृद्घि करनी चाहिए। वहीं, नौजल गांव के प्रधान ठाकुर अनिरुद्ध सिंह का कहना है कि ग्राम पंचायत अपने स्तर से पूरे प्रयास कर रही है। यदि बजट को भी बढ़ाया जाए तो ग्राम पंचायतों की परेशानियां कुछ कम हो जाएंगी।
गोशालाओं में गोवंश की स्थिति
ग्राम पंचायत-कुल गोवंश
चंदेनामाल-68
गंदेवड़ा-59
जलालाबाद देहात-135
थानाभवन देहात-88
नौजल-नौजली-53
बाबरी-80
बंतीखेड़ा-76
कुुल्र-559
भंदौड़ा-00