उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रहा बैंकों का चार्ज
शामली। धनराशि की निकासी और जमा करने पर लगाए गए बैंक चार्ज उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। कैश काउंटर पर 50 हजार रुपये से अधिक जमा करने पर 59 रुपये का शुल्क लिया जा रहा है। इसके अलावा भी प्रतिदिन या प्रतिमाह निर्धारित सीमा से अधिक जमा और निकासी करने पर चार्ज लगाया जाता है। उपभोक्ता को तब पता लगता है, जब उसके खाते से रुपये कट जाते हैं।
लॉकडाउन के बाद बैंकों ने तरह-तरह के शुल्क लगा दिए हैं। इससे उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। पंजाब नेशनल बैंक में बचत खाते में एक दिन में दो लाख रुपये से अधिक जमा करने पर एक हजार रुपये प्रति हजार की दर से और कम से कम 25 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। चालू खाते में दो लाख रुपये जमा करने पर एक रुपया प्रति हजार और कम से कम 50 रुपये शुल्क लगता है। इसी तरह बचत खाते से निकासी की सीमा भी निर्धारित है। माह में पांच बार से ज्यादा यदि धनराशि की निकासी की जाती है तो दो रुपये प्रति हजार का शुल्क लगता है। इसके साथ ही चालू खाते में एक लाख रुपये तक तो कुछ शुल्क नहीं है, लेकिन इससे ज्यादा की निकासी होने पर दो रुपये प्रति हजार चार्ज लिया जाता है। उधर, बताया गया है कि एसबीआई समेत अन्य बैंकों में भी कैश जमा करने और निकासी की सीमा निर्धारित कर दी गई है। कैश काउंटर पर 50 हजार रुपये से ज्यादा जमा करने पर 59 रुपये चार्ज लिया जा रहा है। उपभोक्ताओं को खाते से पैसा कटने के बाद जानकारी होती है।
ऑनलाइन भुगतान और आय बढ़ाने की कवायद
बैंकों के चार्ज लगाने के पीछे ऑनलाइन भुगतान की प्रवृत्ति को बढ़ाने तथा बैंकों की आय में इजाफा करने का तर्क दिया जा रहा है। कोरोना काल में बैंकों की आय भी प्रभावित हुई है। इसके चलते बैंक तरह-तरह के शुल्क लगाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। अग्रणी जिला प्रबंधक शैलेश कुमार का कहना है कि धनराशि की जमा और निकासी की बैंकों ने अलग-अलग सीमा निर्धारित कर रखी है। सभी का अलग-अलग चार्ज है। ऑनलाइन भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह के शुल्क लगाए गए हैं।