फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लाठियां खाईं, सड़क पर घसीटा, फिर भी बोलीं वंदेमातरम

विज्ञापन
शामली सहारनपुर तिराहे पर स्वत्रंता सैनानी ज्ञान देवी धीमान की प्रतिमा - फोटो : SHAMLI
विज्ञापन
शामली। स्वतंत्रता आंदोलन में कई लोगों ने अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। इस आंदोलन में पुरुष के साथ महिलाओं ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया था। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में बुलंद इरादों वाली शामली निवासी महिला ज्ञान देवी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उनका नाम जनपद के स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रदूतों में शामिल है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ज्ञान देवी ने लाठियां खाईं, सड़क पर घसीटा गया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनके मुंह से एक ही नारा लगातार गूंजता रहा, वह नारा था वंदेमातरम। इस आंदोलन में उनके पति प्यारेलाल भी उनके साथ बराबर के भागीदार रहे।
विज्ञापन

साल 1902 में जन्मी ज्ञानदेवी बेहद उत्साही स्वतंत्रता सेनानी थीं। 1930 में हुए नमक सत्याग्रह में उन्हें पांच माह का कड़ा कारावास हुआ था, लेकिन आंदोलन में उनके कदम लगातार आगे बढ़ते गए। 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान उन्हें तीन माह की कैद तथा 30 रुपये जुर्माना लगाया गया था। इसके अलावा 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने पर उन्हें 21 माह की कैद की सजा सुनाई गई।
बताया गया कि आजादी के आंदोलन के साथियों के साथ मिलकर ज्ञानदेवी शामली कोतवाली में तिरंगा फहराने पहुंच गईं थीं। वहां तैनात दरोगा असलम ने विरोध किया। ज्ञान देवी और उनके साथ गए लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया था। अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ही ज्ञानदेवी पर लाठियां बरसाई गईं। सड़क पर गिराकर घसीटा गया। इसके बावजूद उनके मुंह से वंदेमातरम का ही नारा गूंजता रहा।
विज्ञापन

---
इंदिरा गांधी ने ज्ञानदेवी को भेंट किया था ताम्र पत्र
शामली। शहर के मोहल्ला धीमानपुरा निवासी ज्ञान देवी के प्रपौत्र सोहिल धीमान बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से ज्ञान देवी के बेहद नजदीकी संबंध रहे। उनके परदादा प्यारेलाल भी स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। इंदिरा गांधी ने ज्ञानदेवी को ताम्र पत्र भेंट किया था। यह ताम्र पत्र आज भी परिवार के पास सुरक्षित है।
---
एसटी तिराहे पर स्थापित है प्रतिमा
शामली। शहर के सहारनपुर तिराहा स्थित पार्क में स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाली ज्ञान देवी की प्रतिमा एसटी तिराहे पर स्थापित है। इस प्रतिमा के नीचे लिखे शिलापट्ट पर उनके आजादी आंदोलन में किए गए संघर्ष की कहानी भी छपी है। यह प्रतिमा युवा पीढ़ी को अपने देश के प्रति प्रेम के लिए प्रेरित करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें