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खाना खाया, पैर दबाए और कर दिया पूूरे परिवार का खात्मा

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शामली की पंजाबी कालोनी में विलाप करते मृतक अजय पाठक के परिजन। - फोटो : SHAMLI
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अजय पाठक का सबसे खास शिष्य था हिमांशु, गुरु शिष्य के रिश्ते को किया कलंकित
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सोशल मीडिया पर भी एक्टिव था, कई गणमान्य थे फेसबुक फ्रेंड
शामली। अजय पाठक की मंडली का सबसे खास शिष्य था हिमांशु। एक तरह से वो अजय का पीए था। हर काम में आलराउंडर, स्मार्ट पर्सनेल्टी, फेसबुक और सोशल मीडिया में भी सक्रिय था। मंडली के साथ गाने बजाने और कार चलाने में भी एक्सपर्ट हो गया था। रात को गुरूजी (अजय) के घर ही सोया था। उनके पैर भी दबाए और इस दौरान वहशियाना वारदात को अंजाम दे दिया। बुधवार को पूरे शहर में इसी घटना की चर्चा थी।
बताया जाता है कि करीब दो ढाई साल पूर्व भजन मंडली से जुड़ने पर हिमांशु ने अजय पाठक का भरोसा जीत लिया था। मंडली में गाने बजाने में सहयोग के अलावा वो ड्राइविंग भी करता है। अजय पाठक के परिवार में आना जाना भी था। अक्सर रात को उनके घर रुक जाता था। पुलिस के अनुसार घटना वाली रात भी हिमांशु अजय पाठक के घर ही रुका। खाना खाया और अजय पाठक के पैर भी दबाए। रात को ही उसने पूरे परिवार का खात्मा कर दिया।
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पुलिस के सामने भोला बनता रहा हत्यारोपी
शामली। हत्यारोपी हिमांशु पुलिस गिरफ्त में आने के बाद खुद को भोला साबित करता दिखाई दिया। मीडिया के सामने पेश करने पर वह बोला कि मैंने तो गुरुजी से अपने रुपये मांगे थे, उन्हें बताया था कि कर्जा है। बैंक वाले परेशान कर रहे हैं। रात भी उनसे अपने रुपये मांगे लेकिन उन्होंने भला बुरा कहा और रुपये नहीं दिए। हिमांशु ने अफसोस जाहिर कर कहा कि उसके रुपये नहीं दिए और डांट दिया, अपशब्द कहे। उसने बहुत अपमानित महसूस किया। उसके बाद कमरे से नीचे आ गया। उसे पता नहीं क्या हुआ। उसे अब खुद भरोसा नहीं हो रहा है कि उसने ये क्या कर दिया है। पूछने पर बताया कि उसने घर में ही रखी तलवार और चाकू उठाकर पाठक परिवार पर वार किया था।
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दिन निकलने, आवाजाही देेेख बदला इरादा
एसपी के अनुसार आरोपी हिमांशु ने अजय की कार को मकान के बाहर लगाकर पहली मंजिल से भागवत और वसुंधरा का शव नीचे घसीटते हुए उतारा। भागवत का शव कार की डिग्गी में डाल दिया लेकिन वसुंधरा का शव भारी होने की वजह से वह उठा नहीं सका। तब तक दिन निकल चुका था और काफी रोशनी हो गई थी। गली में आवाजाही देख उसने वसुंधरा का शव वापस कमरे में रख दिया और उस पर रजाई डाल दी। कमरे को बाहर से ताला लगा दिया। इसके बाद वह फिर से अजय और स्नेहा के कमरे में गया और उनके शवों पर कंबल डाल दिया। सभी के मोबाइल फोन अपने साथ ले गया। हिमांशु ने हड़बड़ी में मकान की तलाशी भी ली। स्नेहा की अलमारी में ताला नहीं था, अलमारी खोलकर उसने हर बैग निकाल लिया और कमरा बाहर से बंद कर चला गया।
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