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अपराजिता...खुद के बारे में सोचें और अपने बारे में जानें लड़कियां

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अपराजिता शामली ऑनलाइन कार्यशाला के दोरान छात्राओ को आत्म जागरूकता का प्रशिक्षंण देती डॉ रितू जै - फोटो : SHAMLI
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शामली। बेटियों को अपनी आदतों को समझना चाहिए। खुद के बारे में सोचना और अपने बारे में जानना बेहद जरूरी है। अपनी रुचि को समझकर आगे बढ़ें। आत्ममंथन कर अपनी कमियों पर भी ध्यान दें और उन्हें दूर करने के लिए प्रयास करें।
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अमर उजाला के अभियान अपराजिता -100 मिलियन स्माइल के तहत बालिका कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना भारतीय जैन संघटना की ओर से चार दिवसीय आनलाइन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। पहले दिन संयोजिका डा. रितु जैन ने बताया कि स्व-जागरूकता के साथ आत्मसम्मान की रक्षा, संवाद कौशल एवं संबंध निर्वहन कौशल, आत्मसम्मान एवं आत्मरक्षा, मित्रता एवं प्रलोभन से सतर्कता, मासिक धर्म, स्वच्छता एवं सामान्य स्वास्थ्य प्रबंधन तथा केरियर चयन एवं जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय पर जानकारी दी जाएगी। पहले दिन कार्यशाला में शामिल करीब 50 छात्राओं को स्वयं के बारे में सोचने और जानने के लिए प्रेरित किया गया। अपनी आदत, रुचि को परखकर अपनी कमियों का भी आंकलन करें। जीवन की चुनौतियों से लड़ने के लिए आत्म जागरूकता बेहद जरूरी है। एनएसएस के जिला नोडल अधिकारी डा. अजय बाबू शर्मा ने कार्यशाला में विचार रखे। इनसे पूर्व कार्यशाला का शुभारंभ एनएसएस उत्तर प्रदेश के विशेष कार्याधिकारी एवं राज्य संपर्क अधिकारी डा. अंशुमाली शर्मा, एनएसएस भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशक डा. अशोक श्रोती, भारतीय जैन संघटना के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र लुक्कर, भारतीय जैन संघटना के प्रदेश अध्यक्ष मोहित जैन ने किया। कार्यक्रम प्रभारी डा. भूपेंद्र कुमार, अजय जैन, भारतीय जैन संघटना के महामंत्री सुनील जैन तथा महाराष्ट्र से रत्नाकर महाजन शामिल हुए। इस कार्यशाला में शामली, मुजफ्फरनगर, हापुड़, राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र से बेटियां पहुंची।
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- कार्यशाला में पहले दिन स्वयं के बारे में जानने के लिए प्रेरित किया गया। हम लड़कियां घर-परिवार में सबका ख्याल रखती हैं, लेकिन अपने बारे में नहीं सोचती। कार्यशाला से मिली सीख नजरिया बदलने वाली है।
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- काजल, पिलखुवा हापुड़।
- कोरोना काल में खासतौर पर लड़कियों को घरों से बाहर निकलने का कम ही मौका मिल रहा है। आनलाइन कार्यशाला उनके व्यक्तित्व विकास में सहायक होगी। पहले दिन का प्रशिक्षण परिस्थितियों से निपटने के लिए जागरूक करने वाला रहा।
- खुशी जैन, जबलपुर।
- कार्यशाला का पहला दिन था। यह काफी प्रेरणादायक रहा। कार्यशाला से मिला प्रशिक्षण हमें स्वयं के बारे में सोचने और खुद को समझने के लिए प्रेरित करता है। इस तरह के प्रशिक्षण जीवन में बड़े और सकारात्मक बदलाव का कारण बनते हैं।
- भावना जैन।
- आत्म जागरूकता और आत्मविश्लेषण बेहद जरूरी है। जीवन की भागदौड़ और अन्य कार्यों की व्यस्तता के चलते लड़कियां एवं महिलाएं स्वयं के लिए समय नहीं निकाल पाती। उन्हें थोड़ा समय स्वयं के लिए भी देना चाहिए।
- आशी जैन।
- लड़कियों और महिलाओं को जीवन में कदम-कदम पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनका सामना करने तथा बेहतर ढंग से निपटने के लिए इस तरह की कार्यशालाएं काफी सहायक सिद्ध होती हैं।
- पिंकी।
- अमर उजाला के अभियान अपराजिता, एनएसएस और भारतीय जैन संगठना का प्रयास अनूठा है। कार्यशाला में शामिल होकर अपने बारे में जानने और समझने का मौका मिला। यह जानकारी जीवन भर काम आने वाली है। अन्य छात्राओं को भी इसमें शामिल होना चाहिए।
- नाजरीन।
- कार्यशाला को लेकर मैं काफी उत्सुक थी। कार्यशाला के पहले दिन काफी कुछ सीखने को मिला। कार्यशाला में सिखाई गईं बातें लड़कियों के जीवन में कदम-कदम पर काम आने वाली हैं।
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- रविस्ता जैन।
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