अटूट आस्था का केंद्र है प्राचीन भाकूवाला शिव मंदिर
शामली। भगवान श्याम की नगरी शामली का धर्म नगरी के रूप में भी महत्व है। महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण हस्तिनापुर से कुरुक्षेत्र जाते हुए शामली शहर के मध्य स्थित श्री हनुमान धाम में रुके थे। संकट मोचन हनुमान जी के दर्शन के बाद महाभारत युद्ध के लिए अपने सखा अर्जुन के साथ रवाना हुए थे।
श्री हनुमान धाम में संकट मोचन हनुमान मंदिर, जगन्नाथ, मनकामेश्वर महादेव, राम दरबार समेत जहां सभी देवी देवताओं के मंदिरों की श्रृंखला है। मंदिर के शिव सरोवर में द्वादश शिव मंदिर विराजमान हैं। शहर के उत्तर में भाकूवाला शिव मंदिर, मध्य में श्रीहनुमान धाम, सतीवाला मंदिर, पूरब में सिद्धेश्वर सदाशिव मंदिर रेलपार, दक्षिण में कैराना रोड पर गुलजारी वाला शिव मंदिर, पश्चिम में भोलेश्वर महादेव मंदिर विराजमान है। जिला मुख्यालय के सभी शिवालयों का इतिहास मराठाकालीन है।
शहर के माजरा रोड स्थित मराठाकालीन भाकूवाला प्राचीन शिव मंदिर सिद्धपीठ है। इस मंदिर का इतिहास करीब 350 वर्ष पुराना है। इस मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है। यहां नवग्रह मंदिर, श्री दुर्गा, हनुमानजी के मंदिर स्थित हैं। श्रावण मास की शिवरात्रि और फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि पर हरिद्वार से गंगा जल लगाकर श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करते हैं। 1964-65 में भाकूवाला शिव मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी श्री हनुमान धाम मंदिर समिति के अधीन आ गई थी। श्री हनुमान धाम मंदिर समिति की ओर से यहां व्यवस्था की जा रही है।
मंदिर के महंत के रूप में महंत सुरेश थपड़ियाल हैं। हालांकि मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। श्री हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी बताते हैं कि दस साल पूर्व मंदिर परिसर में 58 फुट ऊंचाई की भगवान भोलेश्वर की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई। भगवान आशुतोष की प्रतिमा का अनावरण समारोह में जगद्गुरु शंकराचार्य बद्रिकाश्रम में मौजूद रहे थे। इस शिव मंदिर की मान्यता है कि चालीस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषक करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामना पूरी होती हैं। शामली के अलावा सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और हरियाणा से भी श्रद्धालु यहां मन्नत मांगने आते हैं।