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Amar Ujala Exclusive: पिता का वादा पूरा करने के लिए पाकिस्तान रवाना हुई अर्शी, लाहौर में उबैद से होगा निकाह

Wed, 30 Aug 2023 03:25 PM IST
Dimple Sirohi महबूब अली, संवाद न्यूज एजेंसी, शामली

सार

उत्तर प्रदेश के शामली जनपद  की रहने वाली अर्शी पिता के किए गए वादे को पूरा करने के लिए मां के साथ पाकिस्तान रवाना हो गई है। पाकिस्तान के लाहौर में रहने वाले उबैद से उसका निकाह होगा।
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दुल्हन - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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सीमा हैदर की कहानी तो हर किसी ने सुनी ही है। अपने प्रेमी से शादी करने को वह अपने चार बच्चों के साथ पाकिस्तान से भारत आ पहुंची थी। मामला देशभर में सुर्खियों में रहा। अब हम आपको उत्तर प्रदेश के शामली जिले के काजीवाड़ा मोहल्ले की रहने वाली अर्शी की कहानी के बारे में बताएंगे, जो पिता के किए गए वादे को पूरा करने को पाकिस्तान के लाहौर के उबैद के साथ निकाह करने के लिए अपनी मां शागुफ्ता परवीन के साथ दो दिन पूर्व ही पाकिस्तान के लिए रवाना हो गई।

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शादी को लेकर अर्शी और उबैद के परिवार में खुशी की लहर है। मां बेटी के पाकिस्तान पहुंचते ही निकाह की तारीख तय हो जाएगी और दोनों शादी के बंधन में बंधेंगे। 
 

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काजीवाड़ा मोहल्ले में सलाउद्दीन का परिवार रहता है। परिवार के सदस्य नौकरी और मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। बताया गया कि पाकिस्तान के लाहौर शहर की रहने वाली शागुफ्ता प्रवीण की शादी करीब 47 साल पहले शामली के काजीवाड़ा मोहल्ले के रहने वाले सलाउद्दीन के साथ हुई थी। सलाउद्दीन के परिवार में दो बेटे और दो बेटी है। कोरोना काल के दौरान बीमारी के कारण अचानक सलाउद्दीन का देहांत हो गया था। सलाउद्दीन के बेटे फैसल ने बताया कि वह फर्नीचर की दुकान पर काम करता है।

बताया कि देहांत से पूर्व ही अब्बा ने अर्शी की शादी अम्मी के घर लाहौर में रहने वाले चाचा के लड़के उबैद से तय की थी। मगर बीच में अब्बा अल्लाह को प्यारे हो गए । पिता के किए गए वादे को पूरा करने के लिए सोमवार को ही मां शागुफ्ता, अर्शी के साथ कानूनी प्रक्रिया को पूरी करने के बाद लाहौर के लिए रवाना हो गई। मंगलवार को दोनों बार्डर पर पहुंचीं।

पाकिस्तान जाने के बाद ही अर्शी और उबैद की शादी की तारीख तय होगी। हालांकि, पाकिस्तान से लौटने से पूर्व ही निकाह होने की उम्मीद है। जिसकी तैयारी उबैद और उसके परिजनों ने की हुई है। कहा कि रिश्तेदारी में ही बहन की शादी हो रही है, जिसको लेकर परिवार के लोग भी खुश है और वापस लौटने पर स्वागत की तैयारी कर रहे हैं।

नौकरीपेशा है उबैद
अरशी के परिजनों ने बताया कि उबैद लाहौर में ही नौकरी करता है। उबैद का परिवार भी व्यवहारिक हैं। पहले से ही रिश्तेदारी होने और वादे के कारण ही अरशी की शादी लाहौर में तय की है। काफी समय पहले ही दोनों की शादी तय कर दी गई थी, बस तारीख तय होना बाकी है।
 
भारतीय नागरिकता के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहीं शागुफ्ता
काजीवाड़ा में रहने वाली शागुफ्ता पिछले करीब 47 साल से भारतीय नागरिकता के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। कहा कि हर साल वीजा बढ़ा दिया जाता है, जिसके कारण शामली में रह रही है। पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से बार-बार मांग करने के बावजूद नागरिकता नहीं मिल पा रही है। परिजनों के अनुसार, नागरिकता के लिए चक्कर काटने को मजबूर हैं। 
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 मामले की जानकारी से किया इनकार
इस बारे में एलआईयू इंस्पेक्टर पूनम का कहना है कि काजीवाड़ा से मां और बेटी के पाकिस्तान जाने की सूचना नहीं है। उनके यहां पर पाकिस्तान जाने वाले नहीं बल्कि आने वालों का ब्योरा रखा जाता है। पाकिस्तान से आने वाले जहां खुद ही एलआईयू कार्यालय में आकर जानकारी देते हैं, वहीं विभागीय टीम भी इसका ब्योरा जुटाती है।
 
जिले के 70 से अधिक लोगाें की पाकिस्तान में हैं रिश्तेदारियां
सूत्रों के अनुसार, शामली, कैराना और अन्य स्थानों के 70 से अधिक लोगों की पाकिस्तान के लाहौर और अन्य शहरों में रिश्तेदारियां हैं। सभी वीजा और पासपोर्ट के आधार पर रिश्तेदारियों में आते और जाते रहते हैं। किसी के परिवार में पाकिस्तान से जहां बहुएं आई हुई हैं, वहीं कुछ के फूफा या फिर अन्य रिश्तेदार पाकिस्तान में हैं। पुलिस और एलआईयू समय-समय पर परिवारों का वेरीफिकेशन भी करती रहती है।
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