अब सरकार ने 16 मार्च से 12 से 14 साल के किशोरों को टीकाकरण की शुरूआत की है। अब तक 57963 के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 0.65 प्रतिशत टीकाकरण हो पाया है। एक बूथ पर दिनभर में मुश्किल से 10 से 15 किशोर ही टीका लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इसकी एक वजह इस समय परीक्षाएं चलना भी माना जा रहा है। परीक्षा के दौरान अभिभावकों और किशोरों को लगता है कि अगर टीका लगने के बाद बुखार या अन्य कोई समस्या हुई तो परीक्षा की तैयारियां बाधित हो सकती है।
हालांकि अभी तक जितने भी किशोरों को टीके लगे हैं, उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। किशोरों को टीकाकरण को लेकर अभिभावकों से बातचीत की गई तो उनका कहना है कि कोरोना से बचने का एक मात्र उपाय टीका ही है। उधर, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. राजकुमार सागर का कहना है कि टीकाकरण कम होने की एक वजह परीक्षा चलना माना जा रहा है।
उनका कहना है कि टीका लगने से किसी तरह की कोई समस्या नहीं होती। अगर किसी को हल्का बुखार हो भी जाता है तो वह कुछ समय बाद सामान्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि सभी अभिभावक अपने बच्चों को टीका जरूर लगवाएं और कोरोना संक्रमण के खतरे से बचाएं।