नगरपालिका में बैठे परिवार के लोग
- फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन के बाद पंजाब के जिला होशियारपुर में मजदूरी करने गए परिवार को ठेकेदार ने धोखा दे दिया। सुल्तानपुर निवासी परिवार को किसान ने मजदूरी नहीं दी और राशन भी नहीं मिला। महिला औश्र बच्चों समेत 16 सदस्यों वाला परिवार पैदल ही घर के लिए निकल पड़ा और किसी तरह शामली पहुंचा। यहां रात बिताने के बाद प्रशासन ने उन्हें लखनऊ जाने वाली बस से भेजा।
शामली पहुंचे सुल्तानपुर निवासी बांकेलाल ने बताया कि करीब दो महीने पहले उनके जिले के ठेकेदार ने उन्हें मजदूरी पर पंजाब के होशियारपुर जिले में एक किसान के यहां भिजवाया था। परिवार में बच्चे और महिला समेत 16 सदस्य हैं। उन्होंने किसान के यहां दो माह तक मजदूरी की। जब उन्होंने मजदूरी मांगी तो किसान ने देने से मना कर दिया और कहा कि वह तो पहले ही मजदूरी की रकम ठेकेदार को दे चुका है। आरोप है कि किसान ने उन्हें न तो राशन दिया और न ही जेब खर्च दिया। उनके पास खाने पीने का राशन भी खत्म हो गया।
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इसके बाद परिवार के लोग बच्चों समेत पैदल ही पंजाब से सुल्तानपुर के लिए निकल पड़े। तीन दिन तक कभी पैदल तो कभी किसी वाहन में बैठकर लगभग 300 किमी की दूरी तय कर शामली स्टेशन पर पहुंचे। वहां पता चला कि लखनऊ के लिए कोई ट्रेन नहीं है। इसके बाद वे नगरपालिका पहुंचे। नगरपालिका शामली के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब के होशियारपुर जिले से श्रमिक परिवार पहुंचा था। रात में उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई। प्रशासन की मदद से उनके टिकट की व्यवस्था कर लखनऊ की बस से उनके घर भेज दिया गया है।
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बच्चों को भूख लगी तो खेत से गन्ने खाने पड़े
श्रमिक परिवार की महिला नीरा ने बताया कि जेब में पैसे न होने के कारण बच्चे भी भूखे रहे। बच्चे जब भूख बर्दाश्त नहीं कर पाए तो उन्होंने रास्ते में कई जगह खेत में खड़े गन्ने तोड़कर खिलाकर बच्चों की भूख शांत की।
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