जिला स्वास्थ्य समिति के कार्यों की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने शासन से स्वीकृत धनराशि को खर्च करने में ढील बरतने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस मद में धनराशि स्वीकृत हुई है, उसे समय से खर्च कराया जाए, लेकिन गैरजरूरी कार्यों पर धनराशि खर्च नहीं होनी चाहिए।
सोमवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि जिले की सभी सीएचसी और पीएचसी के लिए अनटाइड फंड, बायोमेडिकल वेस्टेज मैनेजमेंट, सफाई, जनरेटर, जननी सुरक्षा योजना के लिए डाइट खर्च आदि मदों में धनराशि स्वीकृत है। बावजूद इसके धनराशि खर्च करने में ढील बरती जा रही है। यहां तक कि डिलीवरी और नसबंदी को लेकर आशा को भी भुगतान में देरी करना चिंता का विषय है। इस साल के लिए जिला स्वास्थ्य समिति को करीब एक करोड़ 92 लाख रुपये स्वीकृत हुए, जिनमें से 88 लाख 95 हजार ही यानि 53 प्रतिशत धनराशि खर्च हो पाई है। उन्होंने कहा कि शासन ने जिन कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत की है, उन्हें शीघ्रता से पूर्ण कराया जाए। स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों और तीमारदारों को मिलने वाली सुविधाओं में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने टीकाकरण, नसबंदी में तेजी लाने तथा कराए गए कार्यों को पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिए। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी रेनू तिवारी, सीएमओ राजकुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी बलराम कुमार, उपजिलाधिकारी सुरजीत सिंह, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी सुशील कुमार सहित सभी सीएचसी प्रभारी और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
एस-एसटी सतर्कता समिति में होगा परिवर्तन
शामली। कलक्ट्रेट सभाकक्ष में सोमवार को अनुसूचित जाति एवं जनजाति सतर्कता एवं पुनर्वास समिति की बैठक हुई। उसमें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा सिर्फ एक सदस्य मौजूद रहा। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने निर्देश दिए कि समिति में परिवर्तन कर ऐसे लोगों को शामिल किया जाए, जो समिति के कार्यों में गंभीरता रखते हैं। बैठक के दौरान जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि एससी, एसटी वर्ग के लोगों के खिलाफ किसी भी प्रकार के अपराध होने पर उन्हें सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता दिलाई जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस की तरफ से रिपोर्ट आती है। इस साल में अब तक 21 लाख रुपये आर्थिक सहायता के तौर पर वितरित किए गए हैं, जिनमें कुल 21 मामलों में सहायता राशि प्रदान की गई। दो मामलों का अभी निस्तारण नहीं हो पाया है। जिलाधिकारी ने कहा कि समिति में शामिल सदस्य यदि सक्रिय तौर पर समिति कार्यों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, तो ऐसे लोगों को हटाकर अन्य लोगों को शामिल किया जाए। इस दौरान सीडीओ रेनु तिवारी, एसडीएम सुरजीत सिंह, सीओ अशोक कुमार सिंह, डीडीओ बलराम कुमार तथा समिति के सदस्य अधिवक्ता सतेंद्र धीरयान सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।